Correct Answer:
Option C - ‘गौ: +चरति’ की सन्धि ‘गौश्चरति’ है। क्योंकि यदि विसर्ग के बाद ‘च-छ’ हो तो विसर्ग का ‘श्’, ‘ट-ठ’ हो तो ‘ष्’ और ‘त-थ’ हो तो ‘स्’ हो जाता है। इसके अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं- नि: + चय = निश्चय
धनु: + टंकार = धनुष्टंकार
नि: + तार = निस्तार
नि: + छल = निश्छल
C. ‘गौ: +चरति’ की सन्धि ‘गौश्चरति’ है। क्योंकि यदि विसर्ग के बाद ‘च-छ’ हो तो विसर्ग का ‘श्’, ‘ट-ठ’ हो तो ‘ष्’ और ‘त-थ’ हो तो ‘स्’ हो जाता है। इसके अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं- नि: + चय = निश्चय
धनु: + टंकार = धनुष्टंकार
नि: + तार = निस्तार
नि: + छल = निश्छल