Correct Answer:
Option B - ‘‘गद्य की भाषा पर द्विवेदी जी के इस शुभ प्रभाव का स्मरण जब तक भाषा के लिए शुद्धता आवश्यक समझी जाएगी तब तक बना रहेगा।’’ उपरोक्त पंक्ति आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने महावीर प्रसाद द्विवेदी के संबंध में लिखी हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने लिखा- ‘‘हम पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी को पद्य रचना की एक प्रणाली के प्रवर्तक के रूप में पाते हैं।’’ महावीर प्रसाद द्विवेदी ने गद्य और पद्य दोनों के लिए खड़ी बोली में सामान्य बोलचाल की भाषा को प्राथमिकता देने की वकालत की।’’
महावीर प्रसाद द्विवेदी - काव्य मंजूषा, सुमन, देवी-स्तुति शतक, कान्यकुब्जावलीव्रतम्।
नन्ददुलारे वाजपेयी की प्रमुख कृतियाँ - हिन्दी साहित्य : बीसवीं शताब्दी (1942), आधुनिक साहित्य (1950), नयी कविता (1973), सुमित्रानंदन पंत (1976), रस सिद्धान्त (1977), साहित्य का आधुनिक युग (1978) इत्यादि।
नामवर सिंह - छायावाद, इतिहास और आलोचना, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परम्परा की खोज, आलोचक के मुख से, इत्यादि।
B. ‘‘गद्य की भाषा पर द्विवेदी जी के इस शुभ प्रभाव का स्मरण जब तक भाषा के लिए शुद्धता आवश्यक समझी जाएगी तब तक बना रहेगा।’’ उपरोक्त पंक्ति आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने महावीर प्रसाद द्विवेदी के संबंध में लिखी हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने लिखा- ‘‘हम पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी को पद्य रचना की एक प्रणाली के प्रवर्तक के रूप में पाते हैं।’’ महावीर प्रसाद द्विवेदी ने गद्य और पद्य दोनों के लिए खड़ी बोली में सामान्य बोलचाल की भाषा को प्राथमिकता देने की वकालत की।’’
महावीर प्रसाद द्विवेदी - काव्य मंजूषा, सुमन, देवी-स्तुति शतक, कान्यकुब्जावलीव्रतम्।
नन्ददुलारे वाजपेयी की प्रमुख कृतियाँ - हिन्दी साहित्य : बीसवीं शताब्दी (1942), आधुनिक साहित्य (1950), नयी कविता (1973), सुमित्रानंदन पंत (1976), रस सिद्धान्त (1977), साहित्य का आधुनिक युग (1978) इत्यादि।
नामवर सिंह - छायावाद, इतिहास और आलोचना, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परम्परा की खोज, आलोचक के मुख से, इत्यादि।