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Q: .
  • A. 50 - 125 cm
  • B. 20 - 40 cm
  • C. 130 - 155 cm
  • D. 30 - 45 cm
Correct Answer: Option A - मूंगफली की खेती तिलहनी फसल के रूप में की जाती है। इसका पौधा उष्णकटिबन्धीय जलवायु वाला होता है, जिससे इसकी खेती खरीफ और जायद के समय की जाती है। देश में मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग इसी फसल से प्राप्त होता है। 6 से 7 P.H. मान वाली भूमि इसकी खेती के लिये उपयुक्त मानी जाती है। इसकी खेती शुष्क प्रदेशों में अधिक की जाती है तथा इसे अपने वर्धन-काल के दौरान खेती के लिये 50–125 cm वर्षा की आवश्यकता होती है।
A. मूंगफली की खेती तिलहनी फसल के रूप में की जाती है। इसका पौधा उष्णकटिबन्धीय जलवायु वाला होता है, जिससे इसकी खेती खरीफ और जायद के समय की जाती है। देश में मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग इसी फसल से प्राप्त होता है। 6 से 7 P.H. मान वाली भूमि इसकी खेती के लिये उपयुक्त मानी जाती है। इसकी खेती शुष्क प्रदेशों में अधिक की जाती है तथा इसे अपने वर्धन-काल के दौरान खेती के लिये 50–125 cm वर्षा की आवश्यकता होती है।

Explanations:

मूंगफली की खेती तिलहनी फसल के रूप में की जाती है। इसका पौधा उष्णकटिबन्धीय जलवायु वाला होता है, जिससे इसकी खेती खरीफ और जायद के समय की जाती है। देश में मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग इसी फसल से प्राप्त होता है। 6 से 7 P.H. मान वाली भूमि इसकी खेती के लिये उपयुक्त मानी जाती है। इसकी खेती शुष्क प्रदेशों में अधिक की जाती है तथा इसे अपने वर्धन-काल के दौरान खेती के लिये 50–125 cm वर्षा की आवश्यकता होती है।