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Q: .
  • A. संदेहार्थ
  • B. संकेतार्थ
  • C. संभावनार्थ
  • D. निश्चयार्थ
Correct Answer: Option B - प्रश्नगत वाक्य ‘यदि सारा समान मिल गया तो भोजन अच्छा बनेगा’ में क्रिया की वृत्ति का संकेतार्थ भेद प्रस्तुत है। वृत्ति का अर्थ मन:स्थिति है। वक्ता की वृत्ति का बोध क्रिया के जिस रूप से होता है, उसे वृत्ति कहते हैं। हिन्दी में वृत्ति के पाँच भेद हैं। विध्यर्थ:-विध्यर्थ का अर्थ है- विधि सम्बन्धी/क्रिया करने, देने का भाव। जैसे-जरा यह प्रश्न बताइये। निश्चयार्थ:- जिस क्रिया रूप से कार्य के होने का निश्चित रूप से पता चलता है, वहाँ निश्चयार्थ वृत्ति प्रयुक्त होती है। जैसे- आज भारत विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के साथ खेल रहा है। संभावनार्थ:- क्रिया के जिस रूप से संभावना का बोध होता है, वहाँ संभावनार्थ वृत्ति उपस्थित होती है। जैसे- संभव है आज वेतन मिल जाएगा। संदेहार्थ:- क्रिया के जिस रूप से क्रिया के होने में संदेह का भाव हो, उसे संदेहार्थ वृत्ति कहते हैं। जैसे- वह इलाहाबाद से चल पड़ा होगा। संकेतार्थ: जिस वाक्य में दो क्रियाएं होती हैं और उनमें कार्य कारण सम्बन्ध होता है तथा उसके परिणाम की भी सूचना रहती है, उसे संकेतार्थ वृत्ति के नाम से जाना जाता है। जैसे-अगर सब कुछ ठीक रहा तो अंजू का आना निश्चित है।
B. प्रश्नगत वाक्य ‘यदि सारा समान मिल गया तो भोजन अच्छा बनेगा’ में क्रिया की वृत्ति का संकेतार्थ भेद प्रस्तुत है। वृत्ति का अर्थ मन:स्थिति है। वक्ता की वृत्ति का बोध क्रिया के जिस रूप से होता है, उसे वृत्ति कहते हैं। हिन्दी में वृत्ति के पाँच भेद हैं। विध्यर्थ:-विध्यर्थ का अर्थ है- विधि सम्बन्धी/क्रिया करने, देने का भाव। जैसे-जरा यह प्रश्न बताइये। निश्चयार्थ:- जिस क्रिया रूप से कार्य के होने का निश्चित रूप से पता चलता है, वहाँ निश्चयार्थ वृत्ति प्रयुक्त होती है। जैसे- आज भारत विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के साथ खेल रहा है। संभावनार्थ:- क्रिया के जिस रूप से संभावना का बोध होता है, वहाँ संभावनार्थ वृत्ति उपस्थित होती है। जैसे- संभव है आज वेतन मिल जाएगा। संदेहार्थ:- क्रिया के जिस रूप से क्रिया के होने में संदेह का भाव हो, उसे संदेहार्थ वृत्ति कहते हैं। जैसे- वह इलाहाबाद से चल पड़ा होगा। संकेतार्थ: जिस वाक्य में दो क्रियाएं होती हैं और उनमें कार्य कारण सम्बन्ध होता है तथा उसके परिणाम की भी सूचना रहती है, उसे संकेतार्थ वृत्ति के नाम से जाना जाता है। जैसे-अगर सब कुछ ठीक रहा तो अंजू का आना निश्चित है।

Explanations:

प्रश्नगत वाक्य ‘यदि सारा समान मिल गया तो भोजन अच्छा बनेगा’ में क्रिया की वृत्ति का संकेतार्थ भेद प्रस्तुत है। वृत्ति का अर्थ मन:स्थिति है। वक्ता की वृत्ति का बोध क्रिया के जिस रूप से होता है, उसे वृत्ति कहते हैं। हिन्दी में वृत्ति के पाँच भेद हैं। विध्यर्थ:-विध्यर्थ का अर्थ है- विधि सम्बन्धी/क्रिया करने, देने का भाव। जैसे-जरा यह प्रश्न बताइये। निश्चयार्थ:- जिस क्रिया रूप से कार्य के होने का निश्चित रूप से पता चलता है, वहाँ निश्चयार्थ वृत्ति प्रयुक्त होती है। जैसे- आज भारत विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के साथ खेल रहा है। संभावनार्थ:- क्रिया के जिस रूप से संभावना का बोध होता है, वहाँ संभावनार्थ वृत्ति उपस्थित होती है। जैसे- संभव है आज वेतन मिल जाएगा। संदेहार्थ:- क्रिया के जिस रूप से क्रिया के होने में संदेह का भाव हो, उसे संदेहार्थ वृत्ति कहते हैं। जैसे- वह इलाहाबाद से चल पड़ा होगा। संकेतार्थ: जिस वाक्य में दो क्रियाएं होती हैं और उनमें कार्य कारण सम्बन्ध होता है तथा उसके परिणाम की भी सूचना रहती है, उसे संकेतार्थ वृत्ति के नाम से जाना जाता है। जैसे-अगर सब कुछ ठीक रहा तो अंजू का आना निश्चित है।