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  • A. 3 4 1 2
  • B. 3 4 2 1
  • C. 1 2 3 4
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - निम्नलिखित उपन्यायों एवं उनके लेखकों का सही सुमेलन है। उपन्यास लेखक कंकाल जयशंकर प्रसाद निर्मला प्रेमचंद परीक्षा गुरू श्रीनिवास दास झूठा-सच यशपाल ⇒ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने लाल श्रीनिवासदास कृत ‘परीक्षा गुरु’ को अंग्रेजी के ढंग का हिन्दी का पहला मौलिक उपन्यास है। इसका प्रकाधन 1882 में हुआ था। इसमें 41 छोटे-छोटे प्रकरण है। इसमें श्रीनिवासदास जी ने मदनमोहन नामक एक रईस के पतन और फिर सुधार की कहानी सुनाई है। ⇒ प्रेमचंद ने ‘आदर्शोंन्मुख यथार्थवादी’ उपन्यास लेखन की परम्परा का प्रवर्तन किया। प्रेमचंद का मूलनाम धनपतराय था, किन्तु वे नाम बदलकर ‘नवाबराय’ बनारसी के नाम से लिखते है। धनपतराय को ‘प्रेमचंद’ नाम उर्दू के लेखक दयानारायण निगम ने दिया था। ⇒ ‘सेवासदन’ प्रेमचंद का पहला प्रौढ़ हिन्दी उपन्यास है। ⇒ प्रेमचंद का हिन्दी में मूल रूप से लिखा प्रथम उपन्यास ‘कायाकल्प’ (1926) है। ⇒ प्रेमचंद के उपन्यास-देवस्थान रहस्य (1905), प्रेमा (1907), सेवासदन (1918), वरदान (1921), प्रेमाश्रम (1922), रंगभूमि (1925), कायाकल्प (1926), निर्मला (1927), गवन (1931), कर्मभूमि (1933), गोदान (1936), मंगलसूत्र (अधूरा)। ⇒ सन् 1967, में प्रेमचंद ने ‘रूठी रानी’ नामक ऐतिहासिक उपन्यास की रचना की। निर्मला उपन्यास में दहेज और अनमेल विवाह की समस्या का चित्रण है। ⇒ जयशंकर प्रसाद कृत ‘कंकाल’ में हिन्दू समाज की विकृतियों का चित्रण है। साथ ही प्रचलित तीर्थ स्थानों के मिथ्या डंबरों एवं दुराचारों का यथार्थ चित्रण है। ⇒ जयशंकर प्रसाद के उपन्यास-कंकाल (1929), तितली (1934), इरावती (1936) (अपूर्ण ऐतिहासिक)। ⇒ यशपाल के झूठा-सच उपन्यास में 1942 ई. से 1957 ई. तक भारत के राष्ट्रीय एवं सामाजिक जीवन का चित्रण हुआ है। झूठा-सच दो भागों में प्रकाशित है। पहला भाग ‘वतन और देश’ (1958) तथा दूसरा भाग ‘देश का भविष्य’ (1960 ई.) है। ⇒ यशपाल के उपन्यास-दादा कामरेड (1941), देशद्रोही (1943), दिव्या (1945), पार्टी कामरेड (1946), मनुष्य के रूप (1949), अमिता (1956), झूठा-सच (दो भाग-1958, 1960), बारह घंटे (1962), अप्सरा का शाप (1965), क्यों फँसे(1968) मेरी तेरी उसकी बात (1974)।
B. निम्नलिखित उपन्यायों एवं उनके लेखकों का सही सुमेलन है। उपन्यास लेखक कंकाल जयशंकर प्रसाद निर्मला प्रेमचंद परीक्षा गुरू श्रीनिवास दास झूठा-सच यशपाल ⇒ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने लाल श्रीनिवासदास कृत ‘परीक्षा गुरु’ को अंग्रेजी के ढंग का हिन्दी का पहला मौलिक उपन्यास है। इसका प्रकाधन 1882 में हुआ था। इसमें 41 छोटे-छोटे प्रकरण है। इसमें श्रीनिवासदास जी ने मदनमोहन नामक एक रईस के पतन और फिर सुधार की कहानी सुनाई है। ⇒ प्रेमचंद ने ‘आदर्शोंन्मुख यथार्थवादी’ उपन्यास लेखन की परम्परा का प्रवर्तन किया। प्रेमचंद का मूलनाम धनपतराय था, किन्तु वे नाम बदलकर ‘नवाबराय’ बनारसी के नाम से लिखते है। धनपतराय को ‘प्रेमचंद’ नाम उर्दू के लेखक दयानारायण निगम ने दिया था। ⇒ ‘सेवासदन’ प्रेमचंद का पहला प्रौढ़ हिन्दी उपन्यास है। ⇒ प्रेमचंद का हिन्दी में मूल रूप से लिखा प्रथम उपन्यास ‘कायाकल्प’ (1926) है। ⇒ प्रेमचंद के उपन्यास-देवस्थान रहस्य (1905), प्रेमा (1907), सेवासदन (1918), वरदान (1921), प्रेमाश्रम (1922), रंगभूमि (1925), कायाकल्प (1926), निर्मला (1927), गवन (1931), कर्मभूमि (1933), गोदान (1936), मंगलसूत्र (अधूरा)। ⇒ सन् 1967, में प्रेमचंद ने ‘रूठी रानी’ नामक ऐतिहासिक उपन्यास की रचना की। निर्मला उपन्यास में दहेज और अनमेल विवाह की समस्या का चित्रण है। ⇒ जयशंकर प्रसाद कृत ‘कंकाल’ में हिन्दू समाज की विकृतियों का चित्रण है। साथ ही प्रचलित तीर्थ स्थानों के मिथ्या डंबरों एवं दुराचारों का यथार्थ चित्रण है। ⇒ जयशंकर प्रसाद के उपन्यास-कंकाल (1929), तितली (1934), इरावती (1936) (अपूर्ण ऐतिहासिक)। ⇒ यशपाल के झूठा-सच उपन्यास में 1942 ई. से 1957 ई. तक भारत के राष्ट्रीय एवं सामाजिक जीवन का चित्रण हुआ है। झूठा-सच दो भागों में प्रकाशित है। पहला भाग ‘वतन और देश’ (1958) तथा दूसरा भाग ‘देश का भविष्य’ (1960 ई.) है। ⇒ यशपाल के उपन्यास-दादा कामरेड (1941), देशद्रोही (1943), दिव्या (1945), पार्टी कामरेड (1946), मनुष्य के रूप (1949), अमिता (1956), झूठा-सच (दो भाग-1958, 1960), बारह घंटे (1962), अप्सरा का शाप (1965), क्यों फँसे(1968) मेरी तेरी उसकी बात (1974)।

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निम्नलिखित उपन्यायों एवं उनके लेखकों का सही सुमेलन है। उपन्यास लेखक कंकाल जयशंकर प्रसाद निर्मला प्रेमचंद परीक्षा गुरू श्रीनिवास दास झूठा-सच यशपाल ⇒ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने लाल श्रीनिवासदास कृत ‘परीक्षा गुरु’ को अंग्रेजी के ढंग का हिन्दी का पहला मौलिक उपन्यास है। इसका प्रकाधन 1882 में हुआ था। इसमें 41 छोटे-छोटे प्रकरण है। इसमें श्रीनिवासदास जी ने मदनमोहन नामक एक रईस के पतन और फिर सुधार की कहानी सुनाई है। ⇒ प्रेमचंद ने ‘आदर्शोंन्मुख यथार्थवादी’ उपन्यास लेखन की परम्परा का प्रवर्तन किया। प्रेमचंद का मूलनाम धनपतराय था, किन्तु वे नाम बदलकर ‘नवाबराय’ बनारसी के नाम से लिखते है। धनपतराय को ‘प्रेमचंद’ नाम उर्दू के लेखक दयानारायण निगम ने दिया था। ⇒ ‘सेवासदन’ प्रेमचंद का पहला प्रौढ़ हिन्दी उपन्यास है। ⇒ प्रेमचंद का हिन्दी में मूल रूप से लिखा प्रथम उपन्यास ‘कायाकल्प’ (1926) है। ⇒ प्रेमचंद के उपन्यास-देवस्थान रहस्य (1905), प्रेमा (1907), सेवासदन (1918), वरदान (1921), प्रेमाश्रम (1922), रंगभूमि (1925), कायाकल्प (1926), निर्मला (1927), गवन (1931), कर्मभूमि (1933), गोदान (1936), मंगलसूत्र (अधूरा)। ⇒ सन् 1967, में प्रेमचंद ने ‘रूठी रानी’ नामक ऐतिहासिक उपन्यास की रचना की। निर्मला उपन्यास में दहेज और अनमेल विवाह की समस्या का चित्रण है। ⇒ जयशंकर प्रसाद कृत ‘कंकाल’ में हिन्दू समाज की विकृतियों का चित्रण है। साथ ही प्रचलित तीर्थ स्थानों के मिथ्या डंबरों एवं दुराचारों का यथार्थ चित्रण है। ⇒ जयशंकर प्रसाद के उपन्यास-कंकाल (1929), तितली (1934), इरावती (1936) (अपूर्ण ऐतिहासिक)। ⇒ यशपाल के झूठा-सच उपन्यास में 1942 ई. से 1957 ई. तक भारत के राष्ट्रीय एवं सामाजिक जीवन का चित्रण हुआ है। झूठा-सच दो भागों में प्रकाशित है। पहला भाग ‘वतन और देश’ (1958) तथा दूसरा भाग ‘देश का भविष्य’ (1960 ई.) है। ⇒ यशपाल के उपन्यास-दादा कामरेड (1941), देशद्रोही (1943), दिव्या (1945), पार्टी कामरेड (1946), मनुष्य के रूप (1949), अमिता (1956), झूठा-सच (दो भाग-1958, 1960), बारह घंटे (1962), अप्सरा का शाप (1965), क्यों फँसे(1968) मेरी तेरी उसकी बात (1974)।