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Q: .
  • A. परमादेश
  • B. अधिकार पृच्छा
  • C. उत्प्रेषण
  • D. निषेध
Correct Answer: Option C - उत्प्रेषण याचिका/रिट के अंतर्गत न्यायालय, अवर न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित किसी मामले को उच्चतर प्राधिकारी या न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश देता है। ध्यातव्य है कि प्रतिषेध एवं उत्प्रेषण दोनों रिटे अधीनस्थ न्यायालयों के विरूद्ध जारी की जाती है किन्तु दोनों का उद्देश्य पृथक है। प्रतिषेध रिट कार्यवाही के दौरान कार्यवाही को रोकने हेतु जारी की जाती है और उत्प्रेषण रिट मामले को स्थानांतरित करने या कार्यवाही की समाप्ति पर निर्णय को रद्द करने हतु जारी की जाती है।
C. उत्प्रेषण याचिका/रिट के अंतर्गत न्यायालय, अवर न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित किसी मामले को उच्चतर प्राधिकारी या न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश देता है। ध्यातव्य है कि प्रतिषेध एवं उत्प्रेषण दोनों रिटे अधीनस्थ न्यायालयों के विरूद्ध जारी की जाती है किन्तु दोनों का उद्देश्य पृथक है। प्रतिषेध रिट कार्यवाही के दौरान कार्यवाही को रोकने हेतु जारी की जाती है और उत्प्रेषण रिट मामले को स्थानांतरित करने या कार्यवाही की समाप्ति पर निर्णय को रद्द करने हतु जारी की जाती है।

Explanations:

उत्प्रेषण याचिका/रिट के अंतर्गत न्यायालय, अवर न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित किसी मामले को उच्चतर प्राधिकारी या न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश देता है। ध्यातव्य है कि प्रतिषेध एवं उत्प्रेषण दोनों रिटे अधीनस्थ न्यायालयों के विरूद्ध जारी की जाती है किन्तु दोनों का उद्देश्य पृथक है। प्रतिषेध रिट कार्यवाही के दौरान कार्यवाही को रोकने हेतु जारी की जाती है और उत्प्रेषण रिट मामले को स्थानांतरित करने या कार्यवाही की समाप्ति पर निर्णय को रद्द करने हतु जारी की जाती है।