Explanations:
अचरज होत तुमहुँ सम गोरे बाजत कारे। तासो कारे-कारे शब्दहु पर है वारे।। दी गई पंक्तियाँ प्रेमघन ने महापुरुष दादाभाई नौरोजी के अपमान पर लिखी थी। कवि बदरी नारायण चौधरी ने विलायत में दादा भाई नौरोजी को ‘काले’ कहे जाने पर ‘कारे’ शब्द को लेकर ये बड़ी सरल और क्षोभपूर्ण कविता लिखी थी।