Correct Answer:
Option C - शेरशाह सूरी का वास्तविक नाम फरीद था, इसने अपनी शिक्षा जौनपुर से प्राप्त की। 1539 में चौसा का युद्ध हुमायूँ और शेरशाह के बीच लड़ा गया, जिसमें विजय के पश्चात् शेर खां, (शेरशाह) की शक्ति व प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि हुई। उसने शेरशाह की पदवी धारण कर अपने नाम का खुतवा पढ़वाया और अपना नाम सिक्के पर भी अंकित करवाया। 1540 में कन्नौज या बिलग्राम के युद्ध में भी हुमायूँ पराजित हुआ। कालिंजर विजय (1545 ई.) के दौरान बारूद में आग लगने से शेरशाह घायल हो गया, 22 मई, 1545 ई. को उसकी मृत्यु हो गई। शेरशाह का मकबरा बिहार के सासाराम में स्थित है।
C. शेरशाह सूरी का वास्तविक नाम फरीद था, इसने अपनी शिक्षा जौनपुर से प्राप्त की। 1539 में चौसा का युद्ध हुमायूँ और शेरशाह के बीच लड़ा गया, जिसमें विजय के पश्चात् शेर खां, (शेरशाह) की शक्ति व प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि हुई। उसने शेरशाह की पदवी धारण कर अपने नाम का खुतवा पढ़वाया और अपना नाम सिक्के पर भी अंकित करवाया। 1540 में कन्नौज या बिलग्राम के युद्ध में भी हुमायूँ पराजित हुआ। कालिंजर विजय (1545 ई.) के दौरान बारूद में आग लगने से शेरशाह घायल हो गया, 22 मई, 1545 ई. को उसकी मृत्यु हो गई। शेरशाह का मकबरा बिहार के सासाराम में स्थित है।