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  • A. बंगाली राष्ट्रीयता के मूल पर हमला करना
  • B. बाँटो और शासन करों की नीति
  • C. ब्रिटिश राज की शक्ति का प्रदर्शन
  • D. सरकार के प्रशासनिक भार को सहज करना
Correct Answer: Option D - लार्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन का कारण जनता को बताया कि जरूरी प्रशासनिक असुविधा के कारण बंगाल का विभाजन करना पड़ा, परन्तु उसका मकसद बंगाल की राष्ट्रीयता को भंग करना एवं साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देना था ताकि अंग्रेज ‘बाँटो और शासन करो’ की नीति में सफल हो सकें। 19 जुलाई, 1905 ई॰ को बंगाल विभाजन का निर्णय लिया गया। 7 अगस्त, 1905 ई॰ कलकत्ता में बंगाल विभाजन के विरुद्ध ऐतिहासिक ‘बहिष्कार’ प्रस्ताव पारित हुआ और स्वदेशी अपनाने पर बल दिया गया। 16 अक्टूबर 1905 ई॰ में बंगाल विभाजन लागू हुआ पूरे बंगाल ने इसे ‘शोक दिवस’ के रूप में मनाया।
D. लार्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन का कारण जनता को बताया कि जरूरी प्रशासनिक असुविधा के कारण बंगाल का विभाजन करना पड़ा, परन्तु उसका मकसद बंगाल की राष्ट्रीयता को भंग करना एवं साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देना था ताकि अंग्रेज ‘बाँटो और शासन करो’ की नीति में सफल हो सकें। 19 जुलाई, 1905 ई॰ को बंगाल विभाजन का निर्णय लिया गया। 7 अगस्त, 1905 ई॰ कलकत्ता में बंगाल विभाजन के विरुद्ध ऐतिहासिक ‘बहिष्कार’ प्रस्ताव पारित हुआ और स्वदेशी अपनाने पर बल दिया गया। 16 अक्टूबर 1905 ई॰ में बंगाल विभाजन लागू हुआ पूरे बंगाल ने इसे ‘शोक दिवस’ के रूप में मनाया।

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लार्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन का कारण जनता को बताया कि जरूरी प्रशासनिक असुविधा के कारण बंगाल का विभाजन करना पड़ा, परन्तु उसका मकसद बंगाल की राष्ट्रीयता को भंग करना एवं साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देना था ताकि अंग्रेज ‘बाँटो और शासन करो’ की नीति में सफल हो सकें। 19 जुलाई, 1905 ई॰ को बंगाल विभाजन का निर्णय लिया गया। 7 अगस्त, 1905 ई॰ कलकत्ता में बंगाल विभाजन के विरुद्ध ऐतिहासिक ‘बहिष्कार’ प्रस्ताव पारित हुआ और स्वदेशी अपनाने पर बल दिया गया। 16 अक्टूबर 1905 ई॰ में बंगाल विभाजन लागू हुआ पूरे बंगाल ने इसे ‘शोक दिवस’ के रूप में मनाया।