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Q: .
  • A. पहली
  • B. दूसरी
  • C. चौथी
  • D. पाँचवीं
Correct Answer: Option C - कनिष्क के शासनकाल के दौरान कश्मीर के ‘कुण्डलवन’ नामक स्थान पर बौद्ध धर्म की चतुर्थ संगीति का आयोजन किया गया था। इसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान वसुमित्र ने की थी तथा अश्वघोष इसके उपाध्यक्ष बनाए गए थे। इस संगीति में बौद्ध त्रिपिटकों के प्रामाणिक पाठ तैयार हुए तथा ‘विभाषाशास्त्र’ आदि बौद्ध ग्रन्थों का संकलन किया गया। उल्लेखनीय है कि कनिष्क के समय में ही बौद्ध धर्म स्पष्टत: दो सम्प्रदायों (1. हीनयान व 2. महायान) में विभक्त हो गया था।
C. कनिष्क के शासनकाल के दौरान कश्मीर के ‘कुण्डलवन’ नामक स्थान पर बौद्ध धर्म की चतुर्थ संगीति का आयोजन किया गया था। इसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान वसुमित्र ने की थी तथा अश्वघोष इसके उपाध्यक्ष बनाए गए थे। इस संगीति में बौद्ध त्रिपिटकों के प्रामाणिक पाठ तैयार हुए तथा ‘विभाषाशास्त्र’ आदि बौद्ध ग्रन्थों का संकलन किया गया। उल्लेखनीय है कि कनिष्क के समय में ही बौद्ध धर्म स्पष्टत: दो सम्प्रदायों (1. हीनयान व 2. महायान) में विभक्त हो गया था।

Explanations:

कनिष्क के शासनकाल के दौरान कश्मीर के ‘कुण्डलवन’ नामक स्थान पर बौद्ध धर्म की चतुर्थ संगीति का आयोजन किया गया था। इसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान वसुमित्र ने की थी तथा अश्वघोष इसके उपाध्यक्ष बनाए गए थे। इस संगीति में बौद्ध त्रिपिटकों के प्रामाणिक पाठ तैयार हुए तथा ‘विभाषाशास्त्र’ आदि बौद्ध ग्रन्थों का संकलन किया गया। उल्लेखनीय है कि कनिष्क के समय में ही बौद्ध धर्म स्पष्टत: दो सम्प्रदायों (1. हीनयान व 2. महायान) में विभक्त हो गया था।