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Q: .
  • A. सिस्मोग्राफ
  • B. सोनोग्राफ
  • C. स्पेक्ट्रोग्राफ
  • D. स्फिग्मोग्राफ
Correct Answer: Option A - भूगर्भशास्त्र की एक विशेष शाखा, जिसमें भूकम्पों का अध्ययन किया जाता है, सिस्मोलॉजी कहलाता है, जबकि जिन उपकरणों द्वारा भूकम्पीय तरंगों की तीव्रता मापी जाती है, उन्हें सिस्मोग्राफ कहते हैं। इसके तीन स्केल हैं- 1. रॉसी-फेरल स्केल 2. मरकेली स्केल 3. रिक्टर स्केल रिक्टर स्केल-भूकम्प की तीव्रता या ऊर्जा मापने के लिए प्रयोग किया जाता है। रिक्टर स्केल का विकास अमेरिकी वैज्ञानिक चाल्र्स रिक्टर द्वारा 1935ई. में किया गया था। यह एक लघुगणकीय पैमाना है जिसका पाठ्यांक 1 से 9 तक होता है।
A. भूगर्भशास्त्र की एक विशेष शाखा, जिसमें भूकम्पों का अध्ययन किया जाता है, सिस्मोलॉजी कहलाता है, जबकि जिन उपकरणों द्वारा भूकम्पीय तरंगों की तीव्रता मापी जाती है, उन्हें सिस्मोग्राफ कहते हैं। इसके तीन स्केल हैं- 1. रॉसी-फेरल स्केल 2. मरकेली स्केल 3. रिक्टर स्केल रिक्टर स्केल-भूकम्प की तीव्रता या ऊर्जा मापने के लिए प्रयोग किया जाता है। रिक्टर स्केल का विकास अमेरिकी वैज्ञानिक चाल्र्स रिक्टर द्वारा 1935ई. में किया गया था। यह एक लघुगणकीय पैमाना है जिसका पाठ्यांक 1 से 9 तक होता है।

Explanations:

भूगर्भशास्त्र की एक विशेष शाखा, जिसमें भूकम्पों का अध्ययन किया जाता है, सिस्मोलॉजी कहलाता है, जबकि जिन उपकरणों द्वारा भूकम्पीय तरंगों की तीव्रता मापी जाती है, उन्हें सिस्मोग्राफ कहते हैं। इसके तीन स्केल हैं- 1. रॉसी-फेरल स्केल 2. मरकेली स्केल 3. रिक्टर स्केल रिक्टर स्केल-भूकम्प की तीव्रता या ऊर्जा मापने के लिए प्रयोग किया जाता है। रिक्टर स्केल का विकास अमेरिकी वैज्ञानिक चाल्र्स रिक्टर द्वारा 1935ई. में किया गया था। यह एक लघुगणकीय पैमाना है जिसका पाठ्यांक 1 से 9 तक होता है।