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Q: .
  • A. करण कारक
  • B. सम्प्रदान कारक
  • C. अपादान कारक
  • D. कर्म कारक
Correct Answer: Option C - पेड़ से पत्ता गिरा। यहाँ ‘पेड़ से’ में अपादान कारक है। संज्ञा के जिस रूप से किसी वस्तु के अलग होने का भाव प्रकट होता है, उसे अपादान कारक कहते हैं। इसमें ‘से’ परसर्ग का प्रयोग होता है, परन्तु वह अलग होने का भाव प्रकट करता है। यही ‘से’ परसर्ग करण कारक में क्रिया सम्पादन में साधन होने का भाव प्रकट करता है। हिन्दी में आठ एवं संस्कृत में छ: कारक होते हैं। सम्बन्ध एवं सम्बोधन को संस्कृत में कारक श्रेणी में नहीं रखते हैं।
C. पेड़ से पत्ता गिरा। यहाँ ‘पेड़ से’ में अपादान कारक है। संज्ञा के जिस रूप से किसी वस्तु के अलग होने का भाव प्रकट होता है, उसे अपादान कारक कहते हैं। इसमें ‘से’ परसर्ग का प्रयोग होता है, परन्तु वह अलग होने का भाव प्रकट करता है। यही ‘से’ परसर्ग करण कारक में क्रिया सम्पादन में साधन होने का भाव प्रकट करता है। हिन्दी में आठ एवं संस्कृत में छ: कारक होते हैं। सम्बन्ध एवं सम्बोधन को संस्कृत में कारक श्रेणी में नहीं रखते हैं।

Explanations:

पेड़ से पत्ता गिरा। यहाँ ‘पेड़ से’ में अपादान कारक है। संज्ञा के जिस रूप से किसी वस्तु के अलग होने का भाव प्रकट होता है, उसे अपादान कारक कहते हैं। इसमें ‘से’ परसर्ग का प्रयोग होता है, परन्तु वह अलग होने का भाव प्रकट करता है। यही ‘से’ परसर्ग करण कारक में क्रिया सम्पादन में साधन होने का भाव प्रकट करता है। हिन्दी में आठ एवं संस्कृत में छ: कारक होते हैं। सम्बन्ध एवं सम्बोधन को संस्कृत में कारक श्रेणी में नहीं रखते हैं।