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  • A. चित्रकूट
  • B. कानपुर
  • C. लखनऊ
  • D. बाराबंकी
Correct Answer: Option A - जगदगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय की स्थापना 27 सितम्बर, 2002 को चित्रकूट(उ.प्र.) में की गयी। श्री राघवे जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को इस विश्वविद्यालय का आजीवन कुलाधिपति बनाया गया है। वह स्वयं एक अन्धे व्यक्ति हैं। इन्होंने विकलांग व्यक्तियों के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए मिशनरी को आगे बढ़ाया। महत्वपूर्ण तथ्य- ⦁ इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना। ⦁ सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्देश्यों में शिक्षित विकलांग व्यक्तियों के लिए प्लेसमेंट का पता लगाना। ⦁ विकलांग व्यक्तियों को मुख्य धारा में लाने के लिए उपयुक्त शिक्षा प्रदान करके उन्हें आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बढ़ावा देना।
A. जगदगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय की स्थापना 27 सितम्बर, 2002 को चित्रकूट(उ.प्र.) में की गयी। श्री राघवे जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को इस विश्वविद्यालय का आजीवन कुलाधिपति बनाया गया है। वह स्वयं एक अन्धे व्यक्ति हैं। इन्होंने विकलांग व्यक्तियों के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए मिशनरी को आगे बढ़ाया। महत्वपूर्ण तथ्य- ⦁ इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना। ⦁ सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्देश्यों में शिक्षित विकलांग व्यक्तियों के लिए प्लेसमेंट का पता लगाना। ⦁ विकलांग व्यक्तियों को मुख्य धारा में लाने के लिए उपयुक्त शिक्षा प्रदान करके उन्हें आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बढ़ावा देना।

Explanations:

जगदगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय की स्थापना 27 सितम्बर, 2002 को चित्रकूट(उ.प्र.) में की गयी। श्री राघवे जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को इस विश्वविद्यालय का आजीवन कुलाधिपति बनाया गया है। वह स्वयं एक अन्धे व्यक्ति हैं। इन्होंने विकलांग व्यक्तियों के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए मिशनरी को आगे बढ़ाया। महत्वपूर्ण तथ्य- ⦁ इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना। ⦁ सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्देश्यों में शिक्षित विकलांग व्यक्तियों के लिए प्लेसमेंट का पता लगाना। ⦁ विकलांग व्यक्तियों को मुख्य धारा में लाने के लिए उपयुक्त शिक्षा प्रदान करके उन्हें आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बढ़ावा देना।