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Q: .
  • A. स्वप्न
  • B. इड़ा
  • C. आशा
  • D. संघर्ष
Correct Answer: Option B - ‘‘कोई भी हो वह क्या बोले, पालग बन नर निर्भर न करे। अपनी दुर्बलता बल सम्हाल गंतव्य मार्ग पर पैर धरे।’’ उक्त काव्य पंक्ति कामायनी के ‘इड़ा’ सर्ग से उद्धृत है। ‘कामायनी’ (1935 ई.) महाकाव्य के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं। कामायनी में कुल 15 सर्ग हैं। चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा, स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य, आनन्द।
B. ‘‘कोई भी हो वह क्या बोले, पालग बन नर निर्भर न करे। अपनी दुर्बलता बल सम्हाल गंतव्य मार्ग पर पैर धरे।’’ उक्त काव्य पंक्ति कामायनी के ‘इड़ा’ सर्ग से उद्धृत है। ‘कामायनी’ (1935 ई.) महाकाव्य के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं। कामायनी में कुल 15 सर्ग हैं। चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा, स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य, आनन्द।

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‘‘कोई भी हो वह क्या बोले, पालग बन नर निर्भर न करे। अपनी दुर्बलता बल सम्हाल गंतव्य मार्ग पर पैर धरे।’’ उक्त काव्य पंक्ति कामायनी के ‘इड़ा’ सर्ग से उद्धृत है। ‘कामायनी’ (1935 ई.) महाकाव्य के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं। कामायनी में कुल 15 सर्ग हैं। चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा, स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य, आनन्द।