Correct Answer:
Option A - ‘भरपेट’ का समास विग्रह ‘भर-पेट’ होता है। इसमें अव्ययीभाव समास है। अव्ययीभाव समास में पूर्वपद अव्यय होता है तथा यही प्रधान होता है। समस्त पद अव्यय की भाँति काम करता है। द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं, इसमें ‘और’, ‘या’, ‘अथवा’ का लोप पाया जाता है। इसके उदाहरण हैं- सीता-राम, पाप-पुण्य, रात-दिन आदि। तत्पुरुष समास का उत्तर पद प्रधान होता है। इसके उदाहरण हैं- तुलसीकृत, रसोईघर, धनहीन, राजपुत्र आदि। बहुव्रीहि समास में दोनों पद प्रधान नहीं होते बल्कि अन्य अर्थ प्रधान होता है। इसके उदाहरण हैं- लम्बोदर, चक्रधर, दशानन आदि।
A. ‘भरपेट’ का समास विग्रह ‘भर-पेट’ होता है। इसमें अव्ययीभाव समास है। अव्ययीभाव समास में पूर्वपद अव्यय होता है तथा यही प्रधान होता है। समस्त पद अव्यय की भाँति काम करता है। द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं, इसमें ‘और’, ‘या’, ‘अथवा’ का लोप पाया जाता है। इसके उदाहरण हैं- सीता-राम, पाप-पुण्य, रात-दिन आदि। तत्पुरुष समास का उत्तर पद प्रधान होता है। इसके उदाहरण हैं- तुलसीकृत, रसोईघर, धनहीन, राजपुत्र आदि। बहुव्रीहि समास में दोनों पद प्रधान नहीं होते बल्कि अन्य अर्थ प्रधान होता है। इसके उदाहरण हैं- लम्बोदर, चक्रधर, दशानन आदि।