Correct Answer:
Option C - क्रिया के मूल रूप को ‘धातु’ कहते हैं। धातुएँ अकर्मक एवं सकर्मक दो प्रकार की होती हैं। मूल अकर्मक धातुओं में प्रत्यय जोड़कर सकर्मक एवं प्रेरणार्थक धातुएँ बनायी जाती हैं। विकल्प में साधित सकर्मक धातु दिया गया है। अत: यही उत्तर होगा। इसके अतिरिक्त दो या अधिक धातुओं के संयोग से संयुक्त धातुएँ बनती हैं। जैसे – रोने लगा, हँस चुका, पहुंच गया आदि। जिन धातुओं के संपादन में दो कर्मों की आवश्यकता हो ‘द्विकर्मक धातुएँ’ कहलाती हैं। जैसे – ‘मैं लड़के को वेद पढ़ाता हूँ’ यहाँ ‘लड़का’ एवं ‘वेद’ दो अलग-अलग कर्म हैं। अत: पढ़ाता हूँ ‘द्विकर्मक धातु’ है।
C. क्रिया के मूल रूप को ‘धातु’ कहते हैं। धातुएँ अकर्मक एवं सकर्मक दो प्रकार की होती हैं। मूल अकर्मक धातुओं में प्रत्यय जोड़कर सकर्मक एवं प्रेरणार्थक धातुएँ बनायी जाती हैं। विकल्प में साधित सकर्मक धातु दिया गया है। अत: यही उत्तर होगा। इसके अतिरिक्त दो या अधिक धातुओं के संयोग से संयुक्त धातुएँ बनती हैं। जैसे – रोने लगा, हँस चुका, पहुंच गया आदि। जिन धातुओं के संपादन में दो कर्मों की आवश्यकता हो ‘द्विकर्मक धातुएँ’ कहलाती हैं। जैसे – ‘मैं लड़के को वेद पढ़ाता हूँ’ यहाँ ‘लड़का’ एवं ‘वेद’ दो अलग-अलग कर्म हैं। अत: पढ़ाता हूँ ‘द्विकर्मक धातु’ है।