Correct Answer:
Option A - प्राचीन भारत के लोग इस बात पे विश्वास करते थे कि यदि वह ब्राह्मणों के सहयोग से हिरण्य-गर्भ अनुष्ठान करते है, तो बलिदानी व्यक्ति का अगले जन्म में एक क्षत्रिय के रूप में पुनर्जन्म होता है, चाहे जन्म से वह क्षत्रिय ना हो। आठवीं शताब्दी के मध्य में राष्ट्रकूट प्रमुख दंतिदुर्ग ने अपने चालुक्य अधिपति को पराजित कर हिरण्य -गर्भ अनुष्ठान किया था।
A. प्राचीन भारत के लोग इस बात पे विश्वास करते थे कि यदि वह ब्राह्मणों के सहयोग से हिरण्य-गर्भ अनुष्ठान करते है, तो बलिदानी व्यक्ति का अगले जन्म में एक क्षत्रिय के रूप में पुनर्जन्म होता है, चाहे जन्म से वह क्षत्रिय ना हो। आठवीं शताब्दी के मध्य में राष्ट्रकूट प्रमुख दंतिदुर्ग ने अपने चालुक्य अधिपति को पराजित कर हिरण्य -गर्भ अनुष्ठान किया था।