Explanations:
मीरा की काव्य पंक्तियों के संदर्भ में असत्य कथन हैं- • ‘‘मन की मैल हिय ते न छूटी दियो तिलक सिर धोय-पंजाबी भाषा का प्रयोग।’’ • ‘‘दादुर मोर पपीहा बोले, कोयल सबद सुनावै-गुजराती भाषा का प्रयोग।’’ मीरा की भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रज है। मीरा के पद ‘मीराबाई की पदावली’ नाम से प्रकाशित है। मीरा की भक्ति माधुर्य भाव की है। मीराबाई की प्रमुख रचनाएँ - गीत गोविन्द की टीका, राग सोरठा मलार राग, रुक्मणी मंगल इत्यादि।