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Q: .
  • A. कर्मधारय
  • B. द्विगु
  • C. द्वन्द्व
  • D. अव्ययीभाव
Correct Answer: Option A - ‘मैं श्रीरामचन्द्र जी के चरणकमल की वन्दना करती हूँ’ वाक्य में रेखांकित शब्द ‘चरणकमल’ में ‘कर्मधारय समास’ है। इस समास में समस्त पद का उत्तरपद प्रधान होता है तथा पूर्वपद व उत्तरपद में उपमान-उपमेय, अथवा विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है। जैसे– कनकलता – कनक सी लता चन्द्रमुख – चन्द्र के समान मुख क्रोधाग्नि – क्रोध रूपी अग्नि
A. ‘मैं श्रीरामचन्द्र जी के चरणकमल की वन्दना करती हूँ’ वाक्य में रेखांकित शब्द ‘चरणकमल’ में ‘कर्मधारय समास’ है। इस समास में समस्त पद का उत्तरपद प्रधान होता है तथा पूर्वपद व उत्तरपद में उपमान-उपमेय, अथवा विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है। जैसे– कनकलता – कनक सी लता चन्द्रमुख – चन्द्र के समान मुख क्रोधाग्नि – क्रोध रूपी अग्नि

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‘मैं श्रीरामचन्द्र जी के चरणकमल की वन्दना करती हूँ’ वाक्य में रेखांकित शब्द ‘चरणकमल’ में ‘कर्मधारय समास’ है। इस समास में समस्त पद का उत्तरपद प्रधान होता है तथा पूर्वपद व उत्तरपद में उपमान-उपमेय, अथवा विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है। जैसे– कनकलता – कनक सी लता चन्द्रमुख – चन्द्र के समान मुख क्रोधाग्नि – क्रोध रूपी अग्नि