Correct Answer:
Option A - ‘‘मीरा जोर से हँसी।’’ यह वाक्य अकर्मक क्रिया का समुचित उदाहरण है। ऐसी क्रियाएँ जिसका प्रभाव कर्ता पर पड़े तथा उसके सम्पादन हेतु कर्म की आवश्यकता न हो, अकर्मक क्रियाएँ, कहलाती हैं। यहाँ ‘हँसने’ का प्रभाव केवल मीरा (कर्ता) पर पड़ रहा है अत: यहाँ ‘अकर्मक क्रिया’ है। जब कर्ता स्वयं कार्य न कर उसके लिए किसी को प्रेरित करे तो उसे ‘प्रेरणार्थक क्रिया’ कहते हैं। जब क्रिया के सम्पादन में कर्म आवश्यक हो तो ‘सकर्मक क्रिया’ तथा जब दो कर्म की आवश्यकता हो तो ‘द्विकर्मक क्रिया’ होती है।
A. ‘‘मीरा जोर से हँसी।’’ यह वाक्य अकर्मक क्रिया का समुचित उदाहरण है। ऐसी क्रियाएँ जिसका प्रभाव कर्ता पर पड़े तथा उसके सम्पादन हेतु कर्म की आवश्यकता न हो, अकर्मक क्रियाएँ, कहलाती हैं। यहाँ ‘हँसने’ का प्रभाव केवल मीरा (कर्ता) पर पड़ रहा है अत: यहाँ ‘अकर्मक क्रिया’ है। जब कर्ता स्वयं कार्य न कर उसके लिए किसी को प्रेरित करे तो उसे ‘प्रेरणार्थक क्रिया’ कहते हैं। जब क्रिया के सम्पादन में कर्म आवश्यक हो तो ‘सकर्मक क्रिया’ तथा जब दो कर्म की आवश्यकता हो तो ‘द्विकर्मक क्रिया’ होती है।