Correct Answer:
Option B - ‘अंधायुग’ नाटक के संबंध में सत्य कथन निम्नवत् है- ‘अंधायुग’ के पहले अंक का शीर्षक ‘कौरव नगरी’ और दूसरे अंक का शीर्षक ‘पशु का उदय’ है।
अंधायुग के पाँचवे अंक का शीर्षक ‘विजय एक क्रमिक आत्महत्या’ है।
शेष दिए गए अन्य कथन असंगत हैं। अंधायुग नाटक के नाटककार धर्मवीर भारती हैं। इस गीतिनाट्य का प्रकाशन वर्ष सन् 1954 ई. है। इसका कथानक महाभारत युद्ध के अंतिम दिन पर आधारित है। अश्वत्थामा, गांधारी, धृतराष्ट्र, कृतवर्मा, संजय, वृद्ध याचक प्रहरी-1, व्यास, विदुर, युधिष्ठिर, कृपाचार्य, युयुत्सू, गूँगा भिखारी, कृष्ण इत्यादि इस नाटक के प्रमुख पात्र हैं।
B. ‘अंधायुग’ नाटक के संबंध में सत्य कथन निम्नवत् है- ‘अंधायुग’ के पहले अंक का शीर्षक ‘कौरव नगरी’ और दूसरे अंक का शीर्षक ‘पशु का उदय’ है।
अंधायुग के पाँचवे अंक का शीर्षक ‘विजय एक क्रमिक आत्महत्या’ है।
शेष दिए गए अन्य कथन असंगत हैं। अंधायुग नाटक के नाटककार धर्मवीर भारती हैं। इस गीतिनाट्य का प्रकाशन वर्ष सन् 1954 ई. है। इसका कथानक महाभारत युद्ध के अंतिम दिन पर आधारित है। अश्वत्थामा, गांधारी, धृतराष्ट्र, कृतवर्मा, संजय, वृद्ध याचक प्रहरी-1, व्यास, विदुर, युधिष्ठिर, कृपाचार्य, युयुत्सू, गूँगा भिखारी, कृष्ण इत्यादि इस नाटक के प्रमुख पात्र हैं।