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Q: .
  • A. एक टोकरी भर मिट्टी
  • B. दुलाईवाली
  • C. उसने कहा था
  • D. कानों में कंगना
Correct Answer: Option C - सादे ढंग से केवल कुछ अत्यंत व्यंजक घटनाएँ और थोड़ी बातचीत सामने लाकर क्षिप्र गति से किसी एक गंभीर संवेदना या मनोभाव से पर्यवेक्षित होने वाली।’ यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ‘उसने कहा था’ कहानी के संदर्भ में कहा है। यह कहानी 1915 ई. में ‘सरस्वती’ पत्रिका में छपी थी। इसके कहानीकार -चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ हैं। जबकि एक टोकरी-भर मिट्टी के कहानीकार माधव राव सप्रे हैं। ‘दुलाई वाली’ कहानी की कहानीकार बंग महिला हैं, ‘कानों में कंगना’ कहानी के कहानीकार राधिकारमण सिंह हैं।
C. सादे ढंग से केवल कुछ अत्यंत व्यंजक घटनाएँ और थोड़ी बातचीत सामने लाकर क्षिप्र गति से किसी एक गंभीर संवेदना या मनोभाव से पर्यवेक्षित होने वाली।’ यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ‘उसने कहा था’ कहानी के संदर्भ में कहा है। यह कहानी 1915 ई. में ‘सरस्वती’ पत्रिका में छपी थी। इसके कहानीकार -चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ हैं। जबकि एक टोकरी-भर मिट्टी के कहानीकार माधव राव सप्रे हैं। ‘दुलाई वाली’ कहानी की कहानीकार बंग महिला हैं, ‘कानों में कंगना’ कहानी के कहानीकार राधिकारमण सिंह हैं।

Explanations:

सादे ढंग से केवल कुछ अत्यंत व्यंजक घटनाएँ और थोड़ी बातचीत सामने लाकर क्षिप्र गति से किसी एक गंभीर संवेदना या मनोभाव से पर्यवेक्षित होने वाली।’ यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ‘उसने कहा था’ कहानी के संदर्भ में कहा है। यह कहानी 1915 ई. में ‘सरस्वती’ पत्रिका में छपी थी। इसके कहानीकार -चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ हैं। जबकि एक टोकरी-भर मिट्टी के कहानीकार माधव राव सप्रे हैं। ‘दुलाई वाली’ कहानी की कहानीकार बंग महिला हैं, ‘कानों में कंगना’ कहानी के कहानीकार राधिकारमण सिंह हैं।