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Q: .
  • A. उच्चतम न्यायालय
  • B. संसद
  • C. राष्ट्रपति
  • D. राज्य विधानमण्डल
Correct Answer: Option A - मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिये संविधान ने उच्चतम न्यायालय को विशेष उत्तरदायित्व सौंपा है। मौलिक अधिकार - वे अधिकार जो व्यक्ति के जीवन के लिये मौलिक तथा अनिवार्य होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं तथा जिनमें राज्य हस्तक्षेप नहीं कर सकता, मौलिक अधिकार कहलाते हैं। मौलिक अधिकार न्याय योग्य अर्थात् न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय होते हैं। साधारणतया संवैधानिक प्रक्रिया के अलावा इनमें संशोधन नहीं किया जा सकता। संविधान के भाग-3 में मौलिक अधिकारों को स्थान दिया गया है वर्तमान में इनकी संख्या छ: है। संपत्ति के अधिकार को 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा मौलिक अधिकारों की श्रेणी से हटा दिया गया।
A. मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिये संविधान ने उच्चतम न्यायालय को विशेष उत्तरदायित्व सौंपा है। मौलिक अधिकार - वे अधिकार जो व्यक्ति के जीवन के लिये मौलिक तथा अनिवार्य होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं तथा जिनमें राज्य हस्तक्षेप नहीं कर सकता, मौलिक अधिकार कहलाते हैं। मौलिक अधिकार न्याय योग्य अर्थात् न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय होते हैं। साधारणतया संवैधानिक प्रक्रिया के अलावा इनमें संशोधन नहीं किया जा सकता। संविधान के भाग-3 में मौलिक अधिकारों को स्थान दिया गया है वर्तमान में इनकी संख्या छ: है। संपत्ति के अधिकार को 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा मौलिक अधिकारों की श्रेणी से हटा दिया गया।

Explanations:

मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिये संविधान ने उच्चतम न्यायालय को विशेष उत्तरदायित्व सौंपा है। मौलिक अधिकार - वे अधिकार जो व्यक्ति के जीवन के लिये मौलिक तथा अनिवार्य होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं तथा जिनमें राज्य हस्तक्षेप नहीं कर सकता, मौलिक अधिकार कहलाते हैं। मौलिक अधिकार न्याय योग्य अर्थात् न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय होते हैं। साधारणतया संवैधानिक प्रक्रिया के अलावा इनमें संशोधन नहीं किया जा सकता। संविधान के भाग-3 में मौलिक अधिकारों को स्थान दिया गया है वर्तमान में इनकी संख्या छ: है। संपत्ति के अधिकार को 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा मौलिक अधिकारों की श्रेणी से हटा दिया गया।