Correct Answer:
Option D - संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध होता है, वह अधिकरण कारक कहलाता है। इसे में, पर, भीतर, चिह्नों द्वारा प्रकट करते हैं। जैसे-
- कुर्सी पर मास्टर जी बैठे हैं।
- मै पाँच मिनट में आ रहा हूँ।
D. संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध होता है, वह अधिकरण कारक कहलाता है। इसे में, पर, भीतर, चिह्नों द्वारा प्रकट करते हैं। जैसे-
- कुर्सी पर मास्टर जी बैठे हैं।
- मै पाँच मिनट में आ रहा हूँ।