एक तार के टुकड़े को मोड़कर एक वर्ग का आकार दिया जाता है जिसकी भुजाएँ 44 cm. वृत्त का आकार दे दिया गया। इस वृत्त की त्रिज्या क्या है?
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एक कॉलेज में पुरुषों और महिलाओं की संख्या के बीच का अनुपात 21:22 है। यदि पुरुषों की संख्या में 20% की वृद्धि हुई है और महिलाओं की संख्या में 30%की वृद्धि हुई है, तो कॉलेज में पुरुषों और महिलाओं का नया अनुपात क्या होगा?
Which of the following Commissioner of British Kumaun, adopted the Patwari system-in place of Police system-for the general administration ? निम्न में से ब्रिटिश कुमाऊँ के किस कमिश्नर ने, पुलिस व्यवस्था के स्थान पर – सामान्य प्रशासन के लिये – पटवारी व्यवस्था लागू की थी
‘संयुक्त प्रांत’ का नाम उत्तर प्रदेश में बदलने के बाद, इसके प्रथम राज्यपाल कौन थे?
दी गई शृंखला में निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या प्रश्न चिन्ह (?) के स्थान पर आएगी? 14, 15, 30, 33, 132, 137, 822, ?
प्लुत स्वर कौन–सा है?
निर्देश–नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (1 से 9 तक) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए– मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति तभी हो पाती है, जब वह अपने तुच्छ भौतिक जीवन को नगण्य समझकर उत्साह-उमंग के साथ दूसरों की सेवा-सुश्रूषा तथा सत्कार करता है। यह कठोर सत्य है कि हम भौतिक रूप में इस संसार में सीमित अवधि तक ही रहेंगे। हमारी मृत्यु के बाद हमारे निकट सम्बन्धी, मित्र, बन्धु-बांधव जीवनभर हमारे लिए शोकाकुल और प्रेमाकुल भी नहीं रहेंगे। दुख मिश्रित इस निर्बल भावना पर विजय पाने के लिए तब हमारे अन्तर्मन में एक विचार उठता है कि क्यों न हम अपने सत्कर्मों और सद्गुणों का प्रकाश फैलाकर सदा-सदा के लिए अमर हो जाएँ। सेवक-प्रवृत्ति अपनाकर हम ऐसा अवश्य कर सकते हैं। अपने नि:स्वार्थ व्यक्तित्व और परहित कर्मों के बल पर हम हमेशा के लिए मानव जीवन हेतु उत्प्रेरणा बन सकते हैं। अनुपम मनुष्य जीवन को सद्गति प्रदान करने के लिए यह विचार नया नहीं है। ऐसे विचार सज्जन मनुष्यों के अन्तर्मन में सदा उठते रहे हैं तथा इन्हें अपनाकर वे दुनिया में अमर भी हो गए। इस धरा पर स्थायी रूप में नहीं रहने पर भी ऐसे परहितकारी कालांतर तक पूजे जाते रहेंगे। अमूल्य मनुष्य जीवन की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा यही है। यही सीखकर मनुष्य का जीवन आनंदमय और समृद्धिशाली हो सकता है। यदि इस प्रकार मानव जीवन उन्नत होता है तो यह संपूर्ण संसार स्वर्गिक विस्तार ग्रहण कर लेगा। किसी भी मानव को अध्यात्मिकता का जो अंतिम ज्ञान मिलेगा, वह भी यही शिक्षा देगा कि धर्म-कर्म का उद्देश्य सत्कर्मों और सद्गुणों की ज्योति फैलाना ही है। ‘कठोर सत्य’ किसे कहा गया है?
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इन देशों में से किसे यूनाईटेड किंगडम से आजादी मिली?
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