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  • A. कुंडारी, तिरहारी
  • B. नागपुरिया, सुरगुजिया
  • C. कुड़माली, खोंटाली
  • D. खटोला, कुम्भारो
Correct Answer: Option C - मगही के अंतर्गत आने वाली बोलियाँ कुड़माली तथा खोंटाली हैं। ‘मागधी’ अपभ्रंश के अन्तर्गत ‘बिहारी हिन्दी’ का विकास हुआ। इसी ‘बिहारी हिंदी’ से भोजपुरी, मगही तथा मैथिली बोलियों का विकास हुआ। मगही गया, पटना, मुंगेर और हजारीबाग जिलों की बोली है, साथ ही पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के पश्चिम में दक्षिण बिहार के कुछ बसे हुए समुदायों की भी बोली है। • तिरहारी, कुंदरी, खटोला, निभट्टा, पंवारी, सिंकरवारी, बनाफरी, बुन्देली की प्रमुख उपबोलियाँ हैं। • ‘सरगुजिया’ छत्तीसगढ़ी बोली की उत्तरी उप बोली है। संपूर्ण सरगुजा क्षेत्र में सरगुजिया संपर्क भाषा के रूप में व्यवहृत होती है। • ‘नागपुरी’ जिसे ‘सादरी’ के नाम से भी जाना जाता है, यह झारखण्ड, छत्तीसगढ़, ओडि़शा और बिहार के कुछ भागों में बोली जाती है। यह मुख्य रूप से पश्चिमी और मध्य छोटानागपुर पठार क्षेत्र में बोली जाती है।
C. मगही के अंतर्गत आने वाली बोलियाँ कुड़माली तथा खोंटाली हैं। ‘मागधी’ अपभ्रंश के अन्तर्गत ‘बिहारी हिन्दी’ का विकास हुआ। इसी ‘बिहारी हिंदी’ से भोजपुरी, मगही तथा मैथिली बोलियों का विकास हुआ। मगही गया, पटना, मुंगेर और हजारीबाग जिलों की बोली है, साथ ही पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के पश्चिम में दक्षिण बिहार के कुछ बसे हुए समुदायों की भी बोली है। • तिरहारी, कुंदरी, खटोला, निभट्टा, पंवारी, सिंकरवारी, बनाफरी, बुन्देली की प्रमुख उपबोलियाँ हैं। • ‘सरगुजिया’ छत्तीसगढ़ी बोली की उत्तरी उप बोली है। संपूर्ण सरगुजा क्षेत्र में सरगुजिया संपर्क भाषा के रूप में व्यवहृत होती है। • ‘नागपुरी’ जिसे ‘सादरी’ के नाम से भी जाना जाता है, यह झारखण्ड, छत्तीसगढ़, ओडि़शा और बिहार के कुछ भागों में बोली जाती है। यह मुख्य रूप से पश्चिमी और मध्य छोटानागपुर पठार क्षेत्र में बोली जाती है।

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मगही के अंतर्गत आने वाली बोलियाँ कुड़माली तथा खोंटाली हैं। ‘मागधी’ अपभ्रंश के अन्तर्गत ‘बिहारी हिन्दी’ का विकास हुआ। इसी ‘बिहारी हिंदी’ से भोजपुरी, मगही तथा मैथिली बोलियों का विकास हुआ। मगही गया, पटना, मुंगेर और हजारीबाग जिलों की बोली है, साथ ही पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के पश्चिम में दक्षिण बिहार के कुछ बसे हुए समुदायों की भी बोली है। • तिरहारी, कुंदरी, खटोला, निभट्टा, पंवारी, सिंकरवारी, बनाफरी, बुन्देली की प्रमुख उपबोलियाँ हैं। • ‘सरगुजिया’ छत्तीसगढ़ी बोली की उत्तरी उप बोली है। संपूर्ण सरगुजा क्षेत्र में सरगुजिया संपर्क भाषा के रूप में व्यवहृत होती है। • ‘नागपुरी’ जिसे ‘सादरी’ के नाम से भी जाना जाता है, यह झारखण्ड, छत्तीसगढ़, ओडि़शा और बिहार के कुछ भागों में बोली जाती है। यह मुख्य रूप से पश्चिमी और मध्य छोटानागपुर पठार क्षेत्र में बोली जाती है।