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  • A. अभ्यासबोधक पक्ष
  • B. नित्यताबोधक पक्ष
  • C. प्रगतिद्योतक पक्ष
  • D. पूर्णताद्योतक पक्ष
Correct Answer: Option A - प्रश्नगत वाक्य ‘दीपा लगातार पढ़ाई करती थी, इसलिए कक्षा में प्रथम आई।’ में अभ्यास द्योतक पक्ष प्रस्तुत है। क्रिया के जिस रूप से क्रिया व्यापार का बोध होता है, उसे क्रिया का पक्ष कहते हैं। इस क्रिया व्यापार को दो दृष्टियों से परिभाषित किया जाता है- • पहली दृष्टि में क्रिया की प्रक्रिया के आरंभ होने के काल के रूप में • दूसरी दृष्टि में क्रिया की प्रक्रिया के इकाई के रूप में पहले प्रकार के अनुसार क्रिया के पक्ष को चार वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है। (क) आरंभबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया के आरंभ होने की स्थिति का बोध होता है। जैसे-अब रवि घूमने लगा है। (ख) नित्यताबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया की प्रक्रिया की निरन्तरता का बोध होता है। जैसे- रमा कितना स्वादिष्ट भोजन पका रही है। (ग) प्रगतिबोधक पक्ष:- इसमें क्रिया की निरंतर प्रगति का बोध होता है। जैसे-अनीता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। (घ) पूर्णताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया की पूर्ण समाप्ति का ज्ञान होता है। जैसे-वह तब तक जा चुका था। क्रिया प्रक्रिया की इकाई के रूप में निम्नवत् वर्गीकरण किया जाता है। (i) निश्चयताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के आद्यन्त का निश्चय नहीं हो पाता अर्थात् क्रिया सदैव एक समान बनी रहती है। जैसे- सूर्य के बाद ही चन्द्रमा का उदय होता है। (ii) अभ्यासबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के नैसर्गिक रूप से होने की सूचना प्राप्त होती है। जैसे- दीपा लगातार पढ़ाई करती थी, इसलिए कक्षा में प्रथम आई।
A. प्रश्नगत वाक्य ‘दीपा लगातार पढ़ाई करती थी, इसलिए कक्षा में प्रथम आई।’ में अभ्यास द्योतक पक्ष प्रस्तुत है। क्रिया के जिस रूप से क्रिया व्यापार का बोध होता है, उसे क्रिया का पक्ष कहते हैं। इस क्रिया व्यापार को दो दृष्टियों से परिभाषित किया जाता है- • पहली दृष्टि में क्रिया की प्रक्रिया के आरंभ होने के काल के रूप में • दूसरी दृष्टि में क्रिया की प्रक्रिया के इकाई के रूप में पहले प्रकार के अनुसार क्रिया के पक्ष को चार वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है। (क) आरंभबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया के आरंभ होने की स्थिति का बोध होता है। जैसे-अब रवि घूमने लगा है। (ख) नित्यताबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया की प्रक्रिया की निरन्तरता का बोध होता है। जैसे- रमा कितना स्वादिष्ट भोजन पका रही है। (ग) प्रगतिबोधक पक्ष:- इसमें क्रिया की निरंतर प्रगति का बोध होता है। जैसे-अनीता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। (घ) पूर्णताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया की पूर्ण समाप्ति का ज्ञान होता है। जैसे-वह तब तक जा चुका था। क्रिया प्रक्रिया की इकाई के रूप में निम्नवत् वर्गीकरण किया जाता है। (i) निश्चयताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के आद्यन्त का निश्चय नहीं हो पाता अर्थात् क्रिया सदैव एक समान बनी रहती है। जैसे- सूर्य के बाद ही चन्द्रमा का उदय होता है। (ii) अभ्यासबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के नैसर्गिक रूप से होने की सूचना प्राप्त होती है। जैसे- दीपा लगातार पढ़ाई करती थी, इसलिए कक्षा में प्रथम आई।

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प्रश्नगत वाक्य ‘दीपा लगातार पढ़ाई करती थी, इसलिए कक्षा में प्रथम आई।’ में अभ्यास द्योतक पक्ष प्रस्तुत है। क्रिया के जिस रूप से क्रिया व्यापार का बोध होता है, उसे क्रिया का पक्ष कहते हैं। इस क्रिया व्यापार को दो दृष्टियों से परिभाषित किया जाता है- • पहली दृष्टि में क्रिया की प्रक्रिया के आरंभ होने के काल के रूप में • दूसरी दृष्टि में क्रिया की प्रक्रिया के इकाई के रूप में पहले प्रकार के अनुसार क्रिया के पक्ष को चार वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है। (क) आरंभबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया के आरंभ होने की स्थिति का बोध होता है। जैसे-अब रवि घूमने लगा है। (ख) नित्यताबोधक पक्ष:- इस पक्ष में क्रिया की प्रक्रिया की निरन्तरता का बोध होता है। जैसे- रमा कितना स्वादिष्ट भोजन पका रही है। (ग) प्रगतिबोधक पक्ष:- इसमें क्रिया की निरंतर प्रगति का बोध होता है। जैसे-अनीता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। (घ) पूर्णताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया की पूर्ण समाप्ति का ज्ञान होता है। जैसे-वह तब तक जा चुका था। क्रिया प्रक्रिया की इकाई के रूप में निम्नवत् वर्गीकरण किया जाता है। (i) निश्चयताबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के आद्यन्त का निश्चय नहीं हो पाता अर्थात् क्रिया सदैव एक समान बनी रहती है। जैसे- सूर्य के बाद ही चन्द्रमा का उदय होता है। (ii) अभ्यासबोधक पक्ष:- इस पक्ष के अन्तर्गत क्रिया के नैसर्गिक रूप से होने की सूचना प्राप्त होती है। जैसे- दीपा लगातार पढ़ाई करती थी, इसलिए कक्षा में प्रथम आई।