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Q: .
  • A. सिलिकान
  • B. टाइटेनियम
  • C. एल्युमीनियम
  • D. लोहा
Correct Answer: Option A - लैटेराइट मिट्टी में सिलिका ऑक्साइड की कमी होती है। लैटेराइट मृदा का विकास उच्च तापमान एवं अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में होता है। अधिक वर्षा के कारण जल के साथ चूना और सिलिका का निक्षालन हो जाता है तथा लोहे के ऑक्साइड और एल्युमीनियम के यौगिक शेष बचे रहते हैं। लैटेराइट मिट्टी का लाल रंग आयरन ऑक्साइड के कारण होता है। यह मिट्टी मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के पर्वतों के गिरिपद क्षेत्रों, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा के पठारी क्षेत्रों तथा मेघालय के पठार में पायी जाती है। इस मिट्टी में जैव पदार्थ, नाइट्रोजन, फॉस्फेट और कैल्शियम की कमी होती है। इस मृदा को रबड़ और कॉफी के उत्पादन के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
A. लैटेराइट मिट्टी में सिलिका ऑक्साइड की कमी होती है। लैटेराइट मृदा का विकास उच्च तापमान एवं अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में होता है। अधिक वर्षा के कारण जल के साथ चूना और सिलिका का निक्षालन हो जाता है तथा लोहे के ऑक्साइड और एल्युमीनियम के यौगिक शेष बचे रहते हैं। लैटेराइट मिट्टी का लाल रंग आयरन ऑक्साइड के कारण होता है। यह मिट्टी मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के पर्वतों के गिरिपद क्षेत्रों, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा के पठारी क्षेत्रों तथा मेघालय के पठार में पायी जाती है। इस मिट्टी में जैव पदार्थ, नाइट्रोजन, फॉस्फेट और कैल्शियम की कमी होती है। इस मृदा को रबड़ और कॉफी के उत्पादन के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

Explanations:

लैटेराइट मिट्टी में सिलिका ऑक्साइड की कमी होती है। लैटेराइट मृदा का विकास उच्च तापमान एवं अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में होता है। अधिक वर्षा के कारण जल के साथ चूना और सिलिका का निक्षालन हो जाता है तथा लोहे के ऑक्साइड और एल्युमीनियम के यौगिक शेष बचे रहते हैं। लैटेराइट मिट्टी का लाल रंग आयरन ऑक्साइड के कारण होता है। यह मिट्टी मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के पर्वतों के गिरिपद क्षेत्रों, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा के पठारी क्षेत्रों तथा मेघालय के पठार में पायी जाती है। इस मिट्टी में जैव पदार्थ, नाइट्रोजन, फॉस्फेट और कैल्शियम की कमी होती है। इस मृदा को रबड़ और कॉफी के उत्पादन के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।