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Q: ,
  • A. चोल
  • B. कुषाण
  • C. चालुक्य
  • D. गुप्त
Correct Answer: Option A - कदमाई चोल राजवंश के तहत एक भू-राजस्व कर था। यह इस अवधि के दौरान मौजूद 400 करों में से एक था। चोल वंश की स्थापना 9 वीं शताब्दी में विजयालय ((850 - 870 F&.) ई.) ने की थी। विजयालय ने ‘नरकेसरी’ की उपाधि धारण की और निशुम्भ सूदिनी देवी का मंदिर बनवाया। चोल वंश की राजधानी तंजौर (तंजावुर) थी। तंजावुर (तंजौर) का वास्तुकार कुंजरमल्लन राजराज पेरुथच्चन था।
A. कदमाई चोल राजवंश के तहत एक भू-राजस्व कर था। यह इस अवधि के दौरान मौजूद 400 करों में से एक था। चोल वंश की स्थापना 9 वीं शताब्दी में विजयालय ((850 - 870 F&.) ई.) ने की थी। विजयालय ने ‘नरकेसरी’ की उपाधि धारण की और निशुम्भ सूदिनी देवी का मंदिर बनवाया। चोल वंश की राजधानी तंजौर (तंजावुर) थी। तंजावुर (तंजौर) का वास्तुकार कुंजरमल्लन राजराज पेरुथच्चन था।

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कदमाई चोल राजवंश के तहत एक भू-राजस्व कर था। यह इस अवधि के दौरान मौजूद 400 करों में से एक था। चोल वंश की स्थापना 9 वीं शताब्दी में विजयालय ((850 - 870 F&.) ई.) ने की थी। विजयालय ने ‘नरकेसरी’ की उपाधि धारण की और निशुम्भ सूदिनी देवी का मंदिर बनवाया। चोल वंश की राजधानी तंजौर (तंजावुर) थी। तंजावुर (तंजौर) का वास्तुकार कुंजरमल्लन राजराज पेरुथच्चन था।