Correct Answer:
Option D - मनुस्मृति के अनुसार मानव जीवन को चार आश्रमों में बाँटा गया है। ये चार आश्रम है–ब्रह्मचर्य आश्रम, गृहस्थ आश्रम, वानप्रस्थ आश्रम एवं संन्यास आश्रम।
गृहस्थ आश्रम - इस समय मनुष्य को अपने सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह चरण 25 वर्ष से शुरू होता है और 50 वर्ष तक रहता है। गृहस्थ व्यक्ति के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ मनुष्य को अपने पारिवारिक और सामाजिक कत्र्तव्यों दोनों को सन्तुलित करना होता है।
D. मनुस्मृति के अनुसार मानव जीवन को चार आश्रमों में बाँटा गया है। ये चार आश्रम है–ब्रह्मचर्य आश्रम, गृहस्थ आश्रम, वानप्रस्थ आश्रम एवं संन्यास आश्रम।
गृहस्थ आश्रम - इस समय मनुष्य को अपने सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह चरण 25 वर्ष से शुरू होता है और 50 वर्ष तक रहता है। गृहस्थ व्यक्ति के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ मनुष्य को अपने पारिवारिक और सामाजिक कत्र्तव्यों दोनों को सन्तुलित करना होता है।