Correct Answer:
Option C - ‘उठ जाग मुसाफिर’ निबन्ध में उपर्युक्त पंक्तियाँ मास्टर साहब अर्थात् जगदीश बाबू द्वारा कही गई हैं।
⇒ ‘उठ जाग मुसाफिर’ विवेकी राय का ललित निबन्ध है। इसकी भूमिका में विवेकी राय ने लिखा है- ‘‘कई बार चर्चाओं में यह बात आई कि ललित निबन्ध एक ठहरी हुई विधा है और इसमें अब ज्यादा कुछ लिखने करने की सम्भावना नहीं है।’’ इस निबन्ध की शुरुआत मास्टर साहब से मिलने जाने की घटना से शुरु होती है।
ग्रामीण जीवन की गहरी रागात्मकता विवेकी राय के लेखन की खास पहचान है। गंवई जीवन के प्रति ऐसा जुड़ाव हिन्दी के किसी निबन्धकार में सर्वथा दुर्लभ रहा है।
विवेकी राय के निबन्ध संग्रह:-
किसानों का देश (1956), गाँवों की दुनिया (1957), त्रिधारा (1958), फिर बैतलवा डाल पर (1962), जुलूस रुका है (1977), आस्था और चिन्तन (1991), गँवई गंध गुलाब (1980), नया गाँव नाम (1984), आम रास्ता नही है (1988), जगत तपोवन सो कियो (1995), वन तुलसी की गंध (2002), जीवन अज्ञात का गणित है (2004), उठ जाग मुसाफिर (2012)।
C. ‘उठ जाग मुसाफिर’ निबन्ध में उपर्युक्त पंक्तियाँ मास्टर साहब अर्थात् जगदीश बाबू द्वारा कही गई हैं।
⇒ ‘उठ जाग मुसाफिर’ विवेकी राय का ललित निबन्ध है। इसकी भूमिका में विवेकी राय ने लिखा है- ‘‘कई बार चर्चाओं में यह बात आई कि ललित निबन्ध एक ठहरी हुई विधा है और इसमें अब ज्यादा कुछ लिखने करने की सम्भावना नहीं है।’’ इस निबन्ध की शुरुआत मास्टर साहब से मिलने जाने की घटना से शुरु होती है।
ग्रामीण जीवन की गहरी रागात्मकता विवेकी राय के लेखन की खास पहचान है। गंवई जीवन के प्रति ऐसा जुड़ाव हिन्दी के किसी निबन्धकार में सर्वथा दुर्लभ रहा है।
विवेकी राय के निबन्ध संग्रह:-
किसानों का देश (1956), गाँवों की दुनिया (1957), त्रिधारा (1958), फिर बैतलवा डाल पर (1962), जुलूस रुका है (1977), आस्था और चिन्तन (1991), गँवई गंध गुलाब (1980), नया गाँव नाम (1984), आम रास्ता नही है (1988), जगत तपोवन सो कियो (1995), वन तुलसी की गंध (2002), जीवन अज्ञात का गणित है (2004), उठ जाग मुसाफिर (2012)।