Correct Answer:
Option A - खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य प्रियप्रवास है। यह हरिऔध द्वारा सन् 1914 ई. में रचित महाकाव्य है। इस महाकाव्य को 17 सर्गों में लिखा गया है जिसमें कृष्ण के बचपन से लेकर मथुरा प्रस्थान तक की कथा का वर्णन है। ‘प्रियप्रवास’ का सर्वप्रथम नाम ‘ब्रजांगना विलाप’ था। यह सम्पूर्ण काव्य संग्रह वर्णवृत्तों पर आधारित है। पारिजात और वैदेही वनवास हरिऔध द्वारा रचित अन्य काव्य ग्रन्थ हैं। जबकि ‘आँसू’ जयशंकर प्रसाद, ‘भारत-भारती’ मैथिलीशरण गुप्त तथा ‘सरोज स्मृति’ निराला द्वारा रचित रचनाएँ हैं।
A. खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य प्रियप्रवास है। यह हरिऔध द्वारा सन् 1914 ई. में रचित महाकाव्य है। इस महाकाव्य को 17 सर्गों में लिखा गया है जिसमें कृष्ण के बचपन से लेकर मथुरा प्रस्थान तक की कथा का वर्णन है। ‘प्रियप्रवास’ का सर्वप्रथम नाम ‘ब्रजांगना विलाप’ था। यह सम्पूर्ण काव्य संग्रह वर्णवृत्तों पर आधारित है। पारिजात और वैदेही वनवास हरिऔध द्वारा रचित अन्य काव्य ग्रन्थ हैं। जबकि ‘आँसू’ जयशंकर प्रसाद, ‘भारत-भारती’ मैथिलीशरण गुप्त तथा ‘सरोज स्मृति’ निराला द्वारा रचित रचनाएँ हैं।