Correct Answer:
Option B - पुजारी भगवान ‘पीताम्बर’ की पूजा कर रहा है। यहाँ पीताम्बर पद में बहुव्रीहि समास है। पीताम्बर का विग्रह है- पीत (पीला) है अम्बर (वस्त्र) जिसका अर्थात विष्णु। समास में आए पदों को छोड़कर जब किसी अन्य पद की प्रधानता हो, तब उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। यहाँ भी पीत एवं अम्बर दोनों पद प्रधान न होकर अन्य पद ‘विष्णु’ प्रधान है, अत: यहाँ बहुव्रीहि समास है। कर्मधारय समास में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का सम्बन्ध होता है। द्विगु संख्यावाची होता है जो समूह या समाहार बताता है। इसी तरह द्वन्द्व में विग्रह करने पर ‘और’ या इसके अर्थ वाला शब्द आता है तथा दोनों पद प्रधान होते हैं।
B. पुजारी भगवान ‘पीताम्बर’ की पूजा कर रहा है। यहाँ पीताम्बर पद में बहुव्रीहि समास है। पीताम्बर का विग्रह है- पीत (पीला) है अम्बर (वस्त्र) जिसका अर्थात विष्णु। समास में आए पदों को छोड़कर जब किसी अन्य पद की प्रधानता हो, तब उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। यहाँ भी पीत एवं अम्बर दोनों पद प्रधान न होकर अन्य पद ‘विष्णु’ प्रधान है, अत: यहाँ बहुव्रीहि समास है। कर्मधारय समास में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का सम्बन्ध होता है। द्विगु संख्यावाची होता है जो समूह या समाहार बताता है। इसी तरह द्वन्द्व में विग्रह करने पर ‘और’ या इसके अर्थ वाला शब्द आता है तथा दोनों पद प्रधान होते हैं।