Correct Answer:
Option A - भारतीय संविधान के अनुच्छेद-32 में ‘संवैधानिक उपचारों का अधिकार’ के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के विरूद्ध सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय 5 प्रकार की रिट (याचिका) जारी करते हैं।
इसमें उत्प्रेषण (Certiorari) का शाब्दिक अर्थ है- ‘प्रमाणित होना’ या ‘सूचना देना’। इस याचिका का उपयोग तब किया जाता है जब किसी मामले का स्थानांतरण जो निचली अदालत में लम्बित है या किसी वाद में निचली अदालत के आदेश को रद्द करने की आवश्यता होती है।
A. भारतीय संविधान के अनुच्छेद-32 में ‘संवैधानिक उपचारों का अधिकार’ के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के विरूद्ध सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय 5 प्रकार की रिट (याचिका) जारी करते हैं।
इसमें उत्प्रेषण (Certiorari) का शाब्दिक अर्थ है- ‘प्रमाणित होना’ या ‘सूचना देना’। इस याचिका का उपयोग तब किया जाता है जब किसी मामले का स्थानांतरण जो निचली अदालत में लम्बित है या किसी वाद में निचली अदालत के आदेश को रद्द करने की आवश्यता होती है।