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Q: .
  • A. गुप्त समाजों का संगठन
  • B. निष्क्रिय प्रतिरोध
  • C. संवैधानिक आंदोलन
  • D. आतंकवाद
Correct Answer: Option B - अरबिंदो घोष एक भारतीय दार्शनिक, योगी, कवि और राष्ट्रवादी थे। इनका जन्म 15 अगस्त, 1872 को कलकत्ता में हुआ था। इन्होंने भारत की राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन के दौरान सामाजिक परिवर्तन के लिए एक तकनीकी रूप से निष्क्रिय प्रतिरोध के सिद्धांत का उपयोग किया था। उन्होंने यह विचार आयरलैंड के निष्क्रिय प्रतिरोध से लिया था, जो गाँधीजी के निष्क्रिय प्रतिरोध से बिल्कुल अलग था। इनके अनुसार निष्क्रिय प्रतिरोध अहिंसात्मक होना चाहिए, परंतु यदि सरकार निर्दयी है, तो हिंसा का प्रयोग करने से भी चूकना नहीं चाहिए।
B. अरबिंदो घोष एक भारतीय दार्शनिक, योगी, कवि और राष्ट्रवादी थे। इनका जन्म 15 अगस्त, 1872 को कलकत्ता में हुआ था। इन्होंने भारत की राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन के दौरान सामाजिक परिवर्तन के लिए एक तकनीकी रूप से निष्क्रिय प्रतिरोध के सिद्धांत का उपयोग किया था। उन्होंने यह विचार आयरलैंड के निष्क्रिय प्रतिरोध से लिया था, जो गाँधीजी के निष्क्रिय प्रतिरोध से बिल्कुल अलग था। इनके अनुसार निष्क्रिय प्रतिरोध अहिंसात्मक होना चाहिए, परंतु यदि सरकार निर्दयी है, तो हिंसा का प्रयोग करने से भी चूकना नहीं चाहिए।

Explanations:

अरबिंदो घोष एक भारतीय दार्शनिक, योगी, कवि और राष्ट्रवादी थे। इनका जन्म 15 अगस्त, 1872 को कलकत्ता में हुआ था। इन्होंने भारत की राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन के दौरान सामाजिक परिवर्तन के लिए एक तकनीकी रूप से निष्क्रिय प्रतिरोध के सिद्धांत का उपयोग किया था। उन्होंने यह विचार आयरलैंड के निष्क्रिय प्रतिरोध से लिया था, जो गाँधीजी के निष्क्रिय प्रतिरोध से बिल्कुल अलग था। इनके अनुसार निष्क्रिय प्रतिरोध अहिंसात्मक होना चाहिए, परंतु यदि सरकार निर्दयी है, तो हिंसा का प्रयोग करने से भी चूकना नहीं चाहिए।