Explanations:
मध्ययुगीन भारत में भक्ति आन्दोलन के प्रमुख अगुवाकारों में एक शंकराचार्य जी थे। इनके द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक परम्परा को अद्वैतवाद कहा जाता है। इस काल में सामाजिक-धार्मिक सुधारकों द्वारा समाज में विभिन्न तरह से भगवान की भक्ति का प्रचार-प्रसार किया गया।