उन्नीस छात्रों के समूह ने एक परीक्षा दी, एक और छात्र बाद में परीक्षा देकर समूह में शामिल हो गया। उसके अंकों को शामिल करने से, समूह के औसत अंकों में 1.5 अंक की वृद्धि हो गई। उसे शामिल किए बिना औसत अंकों से इस छात्र ने ______ अंक अधिक प्राप्त किए हैं।
सुमेलित कीजिए– सूची-I सूची-II A. उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग 1. ऊधमसिंह नगर B. नानक मत्ता 2. हरिद्वार C. लोहाघाट 3. चम्पावत D. चकराता 4. देहरादून कूट – A B C D
A supply of 160 V, 50 Hz is applied to a coil of 0.2 H inductance. Find the RMS value of current. 0.2 H प्रेरकत्व की एक कुंडली पर 160 V, 50 Hz की आपूर्ति प्रयुक्त की गई है। धारा का RMS मान ज्ञात कीजिए।
मुद्रास्फीति के संबंध में सूची लागत संदर्भित करती है–
Which of the following in a Non- Metallic mineral? निम्नलिखित में से क्या एक गैर-धात्विक खनिज है?
अरस्तू के अनुसार कला क्या है?
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Which of the following is an input device used to verify the legitimacy or originality of paper documents, especially cheques?
निर्देश : नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 325से 333) के सही/सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। उत्तर भारत के संत कवि कबीर और दक्षिण भारत के संत कवि तिरुवल्लुवर के समय में लगभग दो हजार वर्ष का अंतराल है किंतु इन दोनों महाकवियों के जीवन में अद्भभुत साम्य पाया जाता है। दोनों के माता-पिता ने जन्म देकर इन्हें त्याग दिया था, दोनों का लालन-पालन निस्संतान ने बड़े स्नेह और जतन से किया था। व्यवसाय से दोनों जुलाहे थे। दोनों ने सात्विक गृहस्थ जीवन की साधना की थी। तिरुवल्लुवर का प्रामाणिक जीवन-वृत्तांत प्राप्त नहीं होता। प्राय: उन्हें चेन्नई के निकट मइलापुर गाँव का जुलाहा माना जाता है किंतु कुछ लोगों के अनुसार वे राजा एल्लाल के शासन में एक बड़े पदाधिकारी थे और उन्हें वैसा ही सम्मान प्राप्त था जैसा चंद्रगुप्त के शासनकाल में चाणक्य को। उनके बारे में अनेक दंतकथाएँ प्रचलित हैं। जैसे कहा जाता है कि एक संन्यासी नारी जाति से घृणा करता था। उसका विश्वास था कि स्त्रियाँ बुराई की जड़ हैं और उनके साथ ईश्वर-भक्ति हो ही नहीं सकती। तिरुवल्लुवर ने बड़े आदर से उसे अपने घर बुलाया। दो दिन उनके परिवार में रहकर सन्यासी के विचार ही बदल गए। उसने कहा, ‘यदि तिरूवल्लुवर और उनकी पत्नी जैसी जोड़ी हो तो गृहस्थ जीवन ही श्रेष्ठ है।’’ कबीर के दोहों की भाँति तिरुवल्लुवर ने भी छोटे छंद में कविता रची जिसे ‘कुरल’ कहा जाता है। कुरलों का संग्रह उनका एकमात्र ग्रंथ है ‘तिरुवल्लुवर’। तिरुवल्लुरल को तमिल भाषा का वेद माना जाता है। इसका प्रत्येक कुरल एक सूक्ति है और सूक्तियाँ सभी धर्मों का सार है। संपूर्ण मानवजाति को शुभ के लिए प्रेरित करना ही इसका उद्देश्य प्रतीत होता है। जैसे धर्म के बारे में दो कुरलो का आशय है : ⦁ भद्र पुरूषों! पवित्र मानव होना ही धर्म है। स्वच्छ मन वाले बनो और देखो तुम उन्नति के शिखर पर कहाँ-से-कहाँ पहुँच जाते हो। ⦁ झूठ न बोलने के गुण को ग्रहण करो तो किसी अन्य धर्म की आवश्यकता ही न रहेगी।तिरुवल्लुवर और कबीर में साम्य के बिंदु है : (क) जन्म के बाद माता-पिता के द्वारा त्याग देना (ख) एक-से छंद में कविता करना (ग) जुलाहे का व्यवसाय करना (घ) नारी जाती से घृणा करना सही विकल्प को चुनिए
एक गिलास पानी पीने से कितनी कैलोरी मिलती है?
Explanations:
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