Correct Answer:
Option C - केशवानन्द भारती मामले (1973) में उच्चतम न्यायालय ने अपनी पूर्व व्याख्या को अस्वीकार कर दिया और यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का एक भाग है, जिसमें अनुच्छेद-368 के तहत संशोधन किया जा सकता है। प्रस्तावना में आज तक एक बार संशोधन किया जा चुका है, जिसमें 42 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखण्डता शब्द सम्मिलित किए गये।
C. केशवानन्द भारती मामले (1973) में उच्चतम न्यायालय ने अपनी पूर्व व्याख्या को अस्वीकार कर दिया और यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का एक भाग है, जिसमें अनुच्छेद-368 के तहत संशोधन किया जा सकता है। प्रस्तावना में आज तक एक बार संशोधन किया जा चुका है, जिसमें 42 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखण्डता शब्द सम्मिलित किए गये।