Correct Answer:
Option B - ‘मानक-संदर्भित आकलन नैदानिक परीक्षण और उपचारात्मक शिक्षण के लिए उपयोगी नहीं होता है। मानक-संदर्भित आकलन एक आकलन की पारम्परिक विधि है। जिसमें आकलन किसी मानक बिन्दु, विशेष वर्ग या सामान्य उत्तरों पर आधारित होता है। इसमें एक विशेष वर्ग जिसे मानक कहते है, की उपलब्धियों को ध्यान में रखकर परीक्षा परिणाम की व्याख्या की जाती है। इस आकलन का मुख्य लक्ष्य यह पहचानना है कि एक छात्र ने पूर्व निर्धारित सहकर्मी समूह में दूसरों की तुलना में वैâसा प्रदर्शित किया है। यह छात्र के जाखिम के स्तर या आवश्यकता को इंगित करने में मदद करता है।
B. ‘मानक-संदर्भित आकलन नैदानिक परीक्षण और उपचारात्मक शिक्षण के लिए उपयोगी नहीं होता है। मानक-संदर्भित आकलन एक आकलन की पारम्परिक विधि है। जिसमें आकलन किसी मानक बिन्दु, विशेष वर्ग या सामान्य उत्तरों पर आधारित होता है। इसमें एक विशेष वर्ग जिसे मानक कहते है, की उपलब्धियों को ध्यान में रखकर परीक्षा परिणाम की व्याख्या की जाती है। इस आकलन का मुख्य लक्ष्य यह पहचानना है कि एक छात्र ने पूर्व निर्धारित सहकर्मी समूह में दूसरों की तुलना में वैâसा प्रदर्शित किया है। यह छात्र के जाखिम के स्तर या आवश्यकता को इंगित करने में मदद करता है।