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Q: ‘आकृष्टा:’ इति पदे प्रयुक्तं कृदन्तप्रत्ययं चित्वा लिखत-
  • A. क्त
  • B. तुमुन्
  • C. क्त्वा
  • D. शतृ
Correct Answer: Option A - आकृष्टा: इति पदे प्रयुक्तं कृदन्त प्रत्ययं क्त अस्ति। ‘आकृष्टा:’ इस पद में प्रयुक्त कृदन्त प्रत्यय ‘क्त’ है। ‘क्त’ और क्तवतु प्रत्यय भूतकाल में होते हैं। ‘क्त’ का त और क्तवतु कर्तृवाच्य में। क्त प्रत्ययान्त के रूप पुंलिंग में रामवत स्त्रीलिंग में आ लगाकर रमावत् और नपुंसंकलिंग में गृहवत् चलेंगे। आकृष्टा: - आ + कृष् + क्त - आकृष्त त् को ट होगा स्तो: ष्टुनाष्टु: से।
A. आकृष्टा: इति पदे प्रयुक्तं कृदन्त प्रत्ययं क्त अस्ति। ‘आकृष्टा:’ इस पद में प्रयुक्त कृदन्त प्रत्यय ‘क्त’ है। ‘क्त’ और क्तवतु प्रत्यय भूतकाल में होते हैं। ‘क्त’ का त और क्तवतु कर्तृवाच्य में। क्त प्रत्ययान्त के रूप पुंलिंग में रामवत स्त्रीलिंग में आ लगाकर रमावत् और नपुंसंकलिंग में गृहवत् चलेंगे। आकृष्टा: - आ + कृष् + क्त - आकृष्त त् को ट होगा स्तो: ष्टुनाष्टु: से।

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आकृष्टा: इति पदे प्रयुक्तं कृदन्त प्रत्ययं क्त अस्ति। ‘आकृष्टा:’ इस पद में प्रयुक्त कृदन्त प्रत्यय ‘क्त’ है। ‘क्त’ और क्तवतु प्रत्यय भूतकाल में होते हैं। ‘क्त’ का त और क्तवतु कर्तृवाच्य में। क्त प्रत्ययान्त के रूप पुंलिंग में रामवत स्त्रीलिंग में आ लगाकर रमावत् और नपुंसंकलिंग में गृहवत् चलेंगे। आकृष्टा: - आ + कृष् + क्त - आकृष्त त् को ट होगा स्तो: ष्टुनाष्टु: से।