Correct Answer:
Option D - शुद्ध या सरल नमन सिद्धान्त की मान्यतायें–
(i) धरन की कोई भी अनुप्रस्थ काट (Cross-Section) जो कि नमन से पहले समतल है, नमन के बाद भी समतल रहती है।
(ii) धरन की प्रत्येक सतह अपने ऊपर तथा नीचे वाली सतह से प्रभावित हुये बिना ही स्वतन्त्रता से सभी दिशाओं में सिकुड़ तथा खिंच सकती है।
(iii) तनाव तथा संपीडन दोनों में ही धरन पदार्थ के यंग मापांक E का मान समान रहता है।
(iv) धरन का पदार्थ सर्वांगसम (Homogeneous) तथा समगुण (Isotropic) है। जिससे सभी दिशाओं में धरन के प्रत्यास्थता गुण समान है।
D. शुद्ध या सरल नमन सिद्धान्त की मान्यतायें–
(i) धरन की कोई भी अनुप्रस्थ काट (Cross-Section) जो कि नमन से पहले समतल है, नमन के बाद भी समतल रहती है।
(ii) धरन की प्रत्येक सतह अपने ऊपर तथा नीचे वाली सतह से प्रभावित हुये बिना ही स्वतन्त्रता से सभी दिशाओं में सिकुड़ तथा खिंच सकती है।
(iii) तनाव तथा संपीडन दोनों में ही धरन पदार्थ के यंग मापांक E का मान समान रहता है।
(iv) धरन का पदार्थ सर्वांगसम (Homogeneous) तथा समगुण (Isotropic) है। जिससे सभी दिशाओं में धरन के प्रत्यास्थता गुण समान है।