Explanations:
ऐतरेय उपनिषद ऋग्वेद के ऐतरेय आरण्यक की दूसरी पुस्तक के चौथे, पांचवें और छठे अध्याय से संबंधित है और इसे सबसे पुराना उपनिषद माना जाता है। ऋग्वेद 10 मण्डल 1028 सूक्त एवं लगभग 10600 ऋचाएँ हैं। इस वेद के ऋचाओं के पढ़ने वाले ऋषि को होतृ कहते है। इस वेद से आर्यों के राजनीतिक प्रणाली एवं इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है।