Explanations:
‘‘अन्त:करणतत्त्वस्य दम्पत्यो: स्नेहसंश्रयात्। आनन्दग्रन्थिरेकोऽयमपत्यमिति पठ्यते।।’’ इतीयमुक्ति: तमसाया:। अर्थात् पति और पत्नी के हृदयरूपी तत्व के प्रेम का आश्रय होने के कारण ‘सन्तान’ यह अनुपम् सुख की गाँठ कही जाती है। यह तमसा का कथन सीता से है। इसमें अनुष्टुप् छन्द है।