निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र. स. 121-128) के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। एक दूसरा संकट ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और अचानक टूटने से खतरनाक बाढ़ और जलप्लावन का संकट है। पर्यावरण के इस संकट को लेकर देश के लोगों और सरकारों की चेतना का जो स्तर है, वह चिंता बढ़ाने वाला है। खेत खत्म हो रहे हैं, पेड़ काटे जा रहे है और जंगलों को लेकर सिर्फ आंकड़ों पर जोर है। उदारीकरण के बाद लोगों के रहन-सहन और जरूरतों में आया बदलाव अब मुसीबत बनने वाला है। हम में से हर की जिंदगी में गैर जरूरी सुविधाओं का भोग लगातार बढ़ा है। चालीस पार की उम्र वाले आसानी से अपने बचपन के दिनों को याद करके समझ सके है कि संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल उनकी जिंदगी में किस कदर बढ़ चुका है। इसका असर मौसम, खेतों और फसलों पर पड़ रहा है। मार्च में खिलने वाले फूल अब फरवरी में नजर आते हैं। फरवरी में भयानक गरमी पड़ती है और गेहूँ सूखने लगता है और जब तक फसल तैयार होती है अचानक बेमौसम की बारिश उसे तबाह कर देती है। आम के बागवान शुरूआती बौरों को देखकर खुश तो होते हैं पर अचानक मार्च का आंधी-तूफान उनकी सारी खुशियों को निगल जाता है। पर्यावरण वैश्विक समस्या है पर उसका हल हमारी जरूरतों को कम करने में छिपा है। गद्यांश के अनुसार ‘अहंकार में हम केवल बाहर की तरफ देखकर जीते हैं।’ वाक्य का आशय है कि ________
उस संख्या का चयन कीजिए, जो निम्नलिखित श्रेणी में प्रश्न चिह्न (?) के स्थान पर आएगी। 7, 18, 34, 72, 142, ?
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भारतीय साहित्यशास्त्र में रस-निष्पत्ति सिद्धान्त निम्नलिखित साहित्याचार्य की स्थापना है
उदाहरण, निरीक्षण विश्लेषण, वर्गीकरण, नियमीकरण निम्नलिखित में से किस विधि के सोपान हैं?
Select the most appropriate synonym of the given word. Destroy
Directions (For question 7 to 9) : Read the information given below to answer these question: In a certain code 'il be pee' means 'Roses are blue' 'Sik hee' means 'red flowers' and 'pee mit hee' means 'flowers are vegetables'. How is 'roses' written in that code ?
निर्देश–प्रश्न संख्या (192 से 199) अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानां विकल्पात्मकेभ्य : उचिततमम् उत्तरं चिनुत। एकस्मिन् विद्यालये नवमकक्षाया: छात्रेषु अकिञ्चन: इतिनामा एक: छात्र: आसीत् । कक्षाया: सर्वे छात्रा: सम्पन्नपरिवारेभ्य: आसन्, परन्तु अकिञ्चनस्य पिता एकस्मिन् कार्यालये चतुर्थश्रेण्या: कर्मकर: आसीत् । इतरान् सम्पन्नान् छात्रान् दृष्ट्वा प्राय: अकिञ्चनस्य मनसि हीनभावना प्राविशत् । स: अचिन्तयत् एतेषां सहपाठिनां जीवनं धनं अस्ति । धिक् मम अभावपूर्णं जीवनम् । मम सहपाठिनां जीवनं पर्वत इव उच्चतं मम च जीवनं धूलिवत् निम्नम् । यदा स एवं चिन्तयति स्म तदैव वैभव:, तस्य सहपाठी, तम् अवदत् भो मित्र ! अहं त्वत: गणितं पठितुम् इच्छामि। किं त्वम् अद्य सायज्रले मम गृहम् आगन्तुं शक्नोषि। अकिञ्चन: वैभवस्य आमन्त्रणं स्वीकृत्य सायज्रले यदा तस्य गृृहम् अगच्छत् । तदा स: अपश्यत् यत् वैभवस्य गृहे माता पितरौ अनुपस्थितौ आस्ताम्। वैभव: तस्मै असूचयत् यत् रात्रौ विलम्बेन एव तौ गृहम् आगच्छत:। वैभवस्य विषादपूर्णं जीवनं दृष्ट्वा अकिञ्चन: अबोधयत् यत् तस्य गृहे मातापित्रौ: अधिकसानिध्येन तस्य एव जीवनं वरम् न तु वैभवस्य।
Explanations:
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