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Q: अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा 25-30 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्य उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत– स्वे स्वे कर्मण्यभिरत: संसिद्धिं लभते नर:। स्वकर्मनिरत: सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।। यत: प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यचर्य सिद्धिं विन्दति मानव:।। श्रेयान्स्वधर्मो विगुण: परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।। ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।। स्वभावजेन कौन्तेय निबद्ध: स्वेन कर्मणा। कर्तुंनेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्।। ईश्वर: सर्वभूतानां.............। .............यन्त्रारूढानिमायया।। अस्मिन् श्लोके किं छन्द:?
  • A. आर्या
  • B. शार्दूलविक्रीडितम्
  • C. इन्द्रवज्रा
  • D. अनुष्टुप्
Correct Answer: Option D - ईश्वर: सर्वभूतानां.............। .............यन्त्रारूढानिमायया।। अस्मिन् श्लोके अनुष्टुप् छन्द:। अर्थात् इस श्लोक में अनुष्टप् छन्द है। लक्षण–श्लोके षष्ठं गुरूज्ञेय सर्वत्र लघु पञ्चमम्। द्विचतुष्पादयोह्र्रस्वं सप्तम दीर्घमन्ययो:।। अर्थात् इसमें चार चरण होते हैं इसमें छठा वर्ण गुरु वर्ण और पञ्चम वर्ण लघु होता है तथा द्वितीय और चतुर्थ पद में सप्तम् वर्ण ह्रस्व और प्रथम तृतीय में दीर्घ होता है।
D. ईश्वर: सर्वभूतानां.............। .............यन्त्रारूढानिमायया।। अस्मिन् श्लोके अनुष्टुप् छन्द:। अर्थात् इस श्लोक में अनुष्टप् छन्द है। लक्षण–श्लोके षष्ठं गुरूज्ञेय सर्वत्र लघु पञ्चमम्। द्विचतुष्पादयोह्र्रस्वं सप्तम दीर्घमन्ययो:।। अर्थात् इसमें चार चरण होते हैं इसमें छठा वर्ण गुरु वर्ण और पञ्चम वर्ण लघु होता है तथा द्वितीय और चतुर्थ पद में सप्तम् वर्ण ह्रस्व और प्रथम तृतीय में दीर्घ होता है।

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ईश्वर: सर्वभूतानां.............। .............यन्त्रारूढानिमायया।। अस्मिन् श्लोके अनुष्टुप् छन्द:। अर्थात् इस श्लोक में अनुष्टप् छन्द है। लक्षण–श्लोके षष्ठं गुरूज्ञेय सर्वत्र लघु पञ्चमम्। द्विचतुष्पादयोह्र्रस्वं सप्तम दीर्घमन्ययो:।। अर्थात् इसमें चार चरण होते हैं इसमें छठा वर्ण गुरु वर्ण और पञ्चम वर्ण लघु होता है तथा द्वितीय और चतुर्थ पद में सप्तम् वर्ण ह्रस्व और प्रथम तृतीय में दीर्घ होता है।