Q: अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा प्रश्नानां (332-337) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत- विकृतिं नैव गच्छन्ति सङ्गदोषेण साधव:। आवेष्टितं महासर्पै: चन्दनं न विषायते।। मनस्येकं वचस्येकं कर्मण्येकं महात्मनाम् । मनस्यन्द् वचस्यन्यद् कर्मण्यन्यद् दुरात्मनाम्।। चिन्तनीया विपदायादावेव प्रतिक्रिया न कूपखननं युक्तं प्रदीप्ते वह्निना गृहे ।। सेवितव्यो महावृक्ष: फलच्छायासमन्वित: । यदि दैवात्फलं नास्ति छाया केन निवार्यते ।। सर्पदुर्जनयोर्मध्ये वरं सर्पो न दुर्जनम् । सर्पो दशति कालेन दुर्जनस्तु पदे पदे ।। यस्मिन् देशे न सम्मानो न प्रीतिर्न च बान्धवा: न च विद्यागम: कश्चित् न तत्र दिवसं वसेत्तव्यत् प्रत्यययुत: शब्द: क: ?
A.
सेवनीय:
B.
सेवितव्य:
C.
पठनीय:
D.
पर्वत:
Correct Answer:
Option B - तव्यत् प्रत्यययुत: सेवितव्य: शब्द:।
सेवितव्य: शब्द में तव्यत् प्रत्यय है।
तव्यत् प्रत्यय - ‘चाहिए’अर्थ में होता है। तव्यत् का ‘तव्य’ शेष रहता है।
सेवितव्य:
सेव् + तव्यत्
सेवनीय:, पठनीय: में अनीयर् प्रत्यय है।
B. तव्यत् प्रत्यययुत: सेवितव्य: शब्द:।
सेवितव्य: शब्द में तव्यत् प्रत्यय है।
तव्यत् प्रत्यय - ‘चाहिए’अर्थ में होता है। तव्यत् का ‘तव्य’ शेष रहता है।
सेवितव्य:
सेव् + तव्यत्
सेवनीय:, पठनीय: में अनीयर् प्रत्यय है।
Explanations:
तव्यत् प्रत्यययुत: सेवितव्य: शब्द:।
सेवितव्य: शब्द में तव्यत् प्रत्यय है।
तव्यत् प्रत्यय - ‘चाहिए’अर्थ में होता है। तव्यत् का ‘तव्य’ शेष रहता है।
सेवितव्य:
सेव् + तव्यत्
सेवनीय:, पठनीय: में अनीयर् प्रत्यय है।
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