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Q: बच्चों को लिखना सिखाने में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है–
  • A. सुंदर लेखन
  • B. वर्तनी की शुद्धता
  • C. काव्यात्मक भाषा
  • D. विचारों की अभिव्यक्ति
Correct Answer: Option D - बच्चों को लिखना सिखाने में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण विचारों की अभिव्यक्ति होती है। लिखना एक सार्थक गतिविधि तभी बन पायेगी जब बच्चों को अपनी भाषा, अपनी कल्पना, अपनी दृष्टि से लिखने की आजादी मिले। बच्चों को ऐसे अवसर मिले कि वे अपनी भाषा और शैली विकसित कर सवेंâ न कि ब्लैकबोर्ड, किताबों या फिर शिक्षक के लिखे हुए की नकल करते रहें। अर्थात् बच्चों पर अपने भावों, विचारों, अनुभवों आदि को अभिव्यक्त करने में व्याकरणिक नियमों, वर्तनी की शुद्धता, सुन्दर लेखन, काव्यात्मक भाषा जैसी चीजों का दबाव नहीं होना चाहिए।
D. बच्चों को लिखना सिखाने में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण विचारों की अभिव्यक्ति होती है। लिखना एक सार्थक गतिविधि तभी बन पायेगी जब बच्चों को अपनी भाषा, अपनी कल्पना, अपनी दृष्टि से लिखने की आजादी मिले। बच्चों को ऐसे अवसर मिले कि वे अपनी भाषा और शैली विकसित कर सवेंâ न कि ब्लैकबोर्ड, किताबों या फिर शिक्षक के लिखे हुए की नकल करते रहें। अर्थात् बच्चों पर अपने भावों, विचारों, अनुभवों आदि को अभिव्यक्त करने में व्याकरणिक नियमों, वर्तनी की शुद्धता, सुन्दर लेखन, काव्यात्मक भाषा जैसी चीजों का दबाव नहीं होना चाहिए।

Explanations:

बच्चों को लिखना सिखाने में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण विचारों की अभिव्यक्ति होती है। लिखना एक सार्थक गतिविधि तभी बन पायेगी जब बच्चों को अपनी भाषा, अपनी कल्पना, अपनी दृष्टि से लिखने की आजादी मिले। बच्चों को ऐसे अवसर मिले कि वे अपनी भाषा और शैली विकसित कर सवेंâ न कि ब्लैकबोर्ड, किताबों या फिर शिक्षक के लिखे हुए की नकल करते रहें। अर्थात् बच्चों पर अपने भावों, विचारों, अनुभवों आदि को अभिव्यक्त करने में व्याकरणिक नियमों, वर्तनी की शुद्धता, सुन्दर लेखन, काव्यात्मक भाषा जैसी चीजों का दबाव नहीं होना चाहिए।