Correct Answer:
Option C - 31 दिसम्बर, 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में नेहरू रिपोर्ट को निरस्त घोषित कर दिया गया। जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस के इस ऐतिहासिक अधिवेशन का अध्यक्ष चुना गया। इस अधिवेशन में पारित प्रस्ताव संक्षेप में इस प्रकार थे–
1. नेहरू समिति की रिपोर्ट अब निरस्त हो चुकी है। (अर्थात् अधिराज्य का दर्जा अब स्वीकार्य नहीं था)
2. लाहौर कांग्रेस में पारित पूर्ण स्वराज्य प्रस्ताव के अनुसार काँग्रेस के संविधान में `स्वराज' शब्द का अब से अर्थपूर्ण स्वतंत्रता या पूर्ण स्वराज होगा। इससे राष्ट्रीय आन्दोलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
3. केंद्रीय और प्रान्तीय विधानमण्डलों तथा सरकार द्वारा गठित समितियों का पूर्णत: बहिष्कार किया जाना था।
4. भविष्य में होने वाले सभी चुनावों का बहिष्कार किया गया था।
5. सविनय अवज्ञा आंदोलन के (दाण्डी मार्च 1930) कार्यक्रम को प्रारम्भ किया जाना था।
C. 31 दिसम्बर, 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में नेहरू रिपोर्ट को निरस्त घोषित कर दिया गया। जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस के इस ऐतिहासिक अधिवेशन का अध्यक्ष चुना गया। इस अधिवेशन में पारित प्रस्ताव संक्षेप में इस प्रकार थे–
1. नेहरू समिति की रिपोर्ट अब निरस्त हो चुकी है। (अर्थात् अधिराज्य का दर्जा अब स्वीकार्य नहीं था)
2. लाहौर कांग्रेस में पारित पूर्ण स्वराज्य प्रस्ताव के अनुसार काँग्रेस के संविधान में `स्वराज' शब्द का अब से अर्थपूर्ण स्वतंत्रता या पूर्ण स्वराज होगा। इससे राष्ट्रीय आन्दोलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
3. केंद्रीय और प्रान्तीय विधानमण्डलों तथा सरकार द्वारा गठित समितियों का पूर्णत: बहिष्कार किया जाना था।
4. भविष्य में होने वाले सभी चुनावों का बहिष्कार किया गया था।
5. सविनय अवज्ञा आंदोलन के (दाण्डी मार्च 1930) कार्यक्रम को प्रारम्भ किया जाना था।