Explanations:
भवितव्यानां द्वाराणि भवन्ति सर्वत्र इतीयं सूक्ति: ‘अभिज्ञानशाकुन्तले’ वर्तते। ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ नाटक के प्रथम अंक में राजा की दाहिनी भुजा फड़कना, जो कि सुन्दर स्त्री की प्राप्ति होने का संकेत है। राजा दुष्यन्त सोचते हैं कि जंगल में इसकी प्राप्ति कैसे हो सकती है अथवा होनहार (भावी) घटनाओं के लिए द्वार (मार्ग) सर्वत्र हो जाते हैं। यथा- शान्तमिदमाश्रमपदं स्फुरति च बाहु: कुत: फलमिहास्य अथवा भवितव्यानां द्वाराणि भवन्ति सर्वत्र।।