Explanations:
मनुष्य के जन्म से लेकर किशोरावस्था के अंत तक उनमें होने वाले जैविक व मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों को ‘बाल विकास’ कहते हैं। तथा इसके अंतर्गत हम बालक के शारीरिक विकास, मानसिक एवं व्यवहारिक परिवर्तनों तथा वातावरण का बालक पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाता है। इसके साथ ही बालक के वैयक्तिक भिन्नता का भी अध्ययन किया जाता है।